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पूर्व सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा पर वित्तीय गड़बड़ी की जांच तेज,भोपाल से आया नोटिस, हड़कंप



जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग के पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी के मामले में विभागीय जांच तेज हो गई है। भोपाल संभाग के क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय द्वारा शासन का आरोप पत्र पूर्व सीएमएचओ को भेज दिया गया है। डॉ. मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने बिना सामान मिले ही करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया। इस लापरवाही से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। आयुक्त की स्वीकृति के बाद जारी किए गए इस नोटिस में डॉ. मिश्रा को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय मिला है। अगर तय समय में जवाब नहीं आता है, तो विभाग एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई करेगा। वर्तमान में निलंबित चल रहे डॉ. मिश्रा के खिलाफ यह पूरी कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 14(3) के तहत की जा रही है।

​भोपाल कार्यालय से जारी हुआ नोटिस

​क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल के कार्यालय ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए आरोप पत्र तामील कराया है। शासन के निर्देश पर तैयार इस चार्जशीट में वित्तीय अनियमितताओं के हर पहलू को शामिल किया गया है। विभाग का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि करोड़ों रुपए के भुगतान में नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया गया।

​भुगतान प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही

​जांच के दौरान यह बात सामने आई कि स्वास्थ्य विभाग के लिए जरूरी सामग्री और उपकरणों की खरीदी के नाम पर बिना किसी डिलीवरी के ही भुगतान फाइलें पास कर दी गईं। यह सीधे तौर पर सरकारी नियमों का उल्लंघन है। इसकी वजह से सरकारी बजट का बड़ा हिस्सा उन कामों में खर्च दिखा दिया गया जो जमीन पर कभी हुए ही नहीं।

​15 दिन में मांगा गया लिखित जवाब

​उच्च अधिकारियों की अनुमति के बाद जारी हुए इस कारण बताओ नोटिस में डॉ. संजय मिश्रा को 15 दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा और जांच दल सीधे सजा की कार्रवाई की ओर कदम बढ़ा देगा।

​निलंबन के बीच आगे की तैयारी

​डॉ. संजय मिश्रा को इन आरोपों के चलते पहले ही निलंबित किया जा चुका है। क्षेत्रीय संचालक कार्यालय अब उनके जवाब का इंतजार कर रहा है ताकि उस रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए संचालनालय भेजा जा सके। मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत इस मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

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