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जबलपुर में बोले सीजेआई- एमपी जैसी डिजिटल न्याय व्यवस्था पूरे देश में लागू करेंगे

जबलपुर. मध्य प्रदेश में हुए न्याय प्रक्रिया में डिजिटल सुधारों पर पूरे देश की नजर है. हम इन सुधारों को पूरे देश में लागू करने की कोशिश करेंगे. हालांकि, ये चुनौतीपूर्ण भी होगा. ये कहना है भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का. उन्होंने ये बात जबलपुर के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आयोजित फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन कार्यक्रम में कही. उन्होंने न्याय व्यवस्था के डिजिटल स्वरूप की तारीफ करने के साथ चिंता भी जताई और कहा कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य में ही कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर लोग तकनीकी रूप से साक्षर नहीं हैं. ऐसे लोगों के मन में न्याय व्यवस्था की नई तकनीक पर विश्वास जमाना एक बड़ी चुनौती है. इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के साथ सुप्रीम कोर्ट के नौ जस्टिस और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज शामिल हुए.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वे बहुत साल पहले मध्य प्रदेश आए थे और उन्होंने नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक का दौरा किया था. उन्होंने कहा, जैसे अमरकंटक से निकलने वाली छोटी सी नर्मदा नदी जिस तरह जबलपुर आते-आते एक विशाल नदी बन जाती है, ठीक उसी तरह न्याय व्यवस्था में आज का कार्यक्रम भी है, जहां छोटे-छोटे तकनीकी सुधार और लॉन्च किए गए एप न्याय व्यवस्था में एक बड़े सुधार के रूप में नजर आ रहे हैं.

जस्टिस सूर्यकांत ने हाईकोर्ट और राज्य सरकार की तारीफ करते हुए कहा,  डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कैदियों-बंदियों की समय पर रिहाई, तत्काल सुनवाई और कोर्ट आदेशों के डिजिटलीकरण जैसी सुविधाएं आसान होंगी. न्यायिक सुविधाओं का यह विस्तार देशभर में लागू किए जाने लायक मॉडल है. हम कोशिश करेंगे कि भारत सरकार इस पूरे देश में ऑल इंडिया लेवल पर लागू करें. उन्होंने बताया कि न्याय व्यवस्था में एआई प्रयोग को लेकर भी एक कमेटी बनाई है, जो अदालत में लंबित मामलों को कैसे जल्द निपटारा किया जाए, इस पर काम कर रही है. जल्दी ही इस मामले में वे एक बड़े कार्यक्रम के माध्यम से जानकारी देंगे.

कोविड के दौरान भी नहीं रूकी भारतीय न्याय व्यवस्था

जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि भारत में जब सबसे पहले कंप्यूटर आया था तब न्याय व्यवस्था ही थी, जिसे सबसे पहले कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू किया. इसी तरह जब डिजिटाइजेशन हुआ तब भी भारतीय न्याय व्यवस्था बहुत आगे थी. चीफ जस्टिस ने कहा, '' भारतीय न्याय व्यवस्था ने कोविड महामारी के दौरान पूरी दुनिया में अपना नाम कमाया था, क्योंकि भारत अकेला ऐसा देश था जिसने कोविड महामारी के दौरान भी न्याय प्रक्रिया रुकी नहीं थी. इसकी वजह से पूरी दुनिया में हमारी तारीफ हुई थी.'' उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज जिस तरह के डिजिटल सुधार किए हैं उसे भी पूरी दुनिया में देखा जाएगा और हमारी इज्जत और अधिक बढ़ जाएगी.

नई तकनीक से होगी समय की बचत, जल्दी मिलेगी न्याय

जस्टिस सूर्यकांत ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि उनके सामने एक बार ऐसा मामला भी आया था जिसमें एक बंदी को कई बार जमानत दे दी गई लेकिन कम्युनिकेशन सिस्टम कमजोर होने की वजह से उसका बेल ऑर्डर जेल तक ही नहीं पहुंच पाया. इस वजह से वह लंबे समय तक जेल में ही बंद रहा. उन्होंने कहा कि नए सिस्टम के आने के बाद ऐसी संभावनाएं खत्म हो जाएंगी. जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि तकनीक के इस नए प्रयोग से ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और लोगों में इस बात का भरोसा भी बढ़ेगा कि लोगों को सही और समय पर न्याय मिल रहा है.

सभी तक नई व्यवस्था पहुंचाना एक चुनौती

हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि तकनीक का परिवर्तन होना अच्छा है लेकिन मध्य प्रदेश जैसे राज्य में हर ओर इस बदलाव को पहुंचाना आसान नहीं होगा. उन्होंने कहा, आज भी बहुत से लोग न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव को नहीं समझते, जो ऑनलाइन जैसी व्यवस्था नहीं जानते उन तक इस व्यवस्था को कैसे पहुंचाया जाएगा यह एक बड़ी चुनौती है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नए सॉफ्टवेयर की भाषा सरल होनी चाहिए और हमें वालंटियर तैयार करने होंगे जो स्थानीय भाषाओं में लोगों को न्याय व्यवस्था के तकनीकी सुधारों के बारे में समझा सकें. 

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