जबलपुर/दमोह। जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में करीब ढाई साल से नौकरी कर रहे फर्जी डाक्टर अजय मौर्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसके अलावा दमोह से दो फर्जी डाक्टर कुमार सचिन यादव व राजपाल गौर को गिरफ्तार किया है। दोनों फर्जी डाक्टर दमोह के आरोग्य केन्द्र के क्लीनिक में में करीब एक साल से काम कर रहे थे, इन दोनों ने पूछताछ में जबलपुर में कार्यरत अजय मौर्य के बारे में बताया है।
पुलिस अधिकारियों को मुख्य स्वास्थ्य व चिकित्सा अधिकारी (CMHO) ऑफिस से एक शिकायत मिली थी। जिसमें बताया गया कि डॉ. कुमार सचिन यादव (ग्वालियर) और डॉ. राजपाल गौर (सीहोर) ने संजीवनी क्लीनिक, सुभाष कॉलोनी में भर्ती के समय एमबीबीएस की फर्जी डिग्री, मेडिकल काउंसलिंग का रजिस्ट्रेशन और दूसरे जाली कागजात जमा किए थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के दम पर दोनों करीब एक साल भर से नौकरी कर रहे है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाने में प्रकरण दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया गया। दोनों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि मुरैना जिला निवासी अजय मौर्य जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में ढाई साल से फर्जी दस्तावेज के आधार पर कार्यरत है, जिसपर पुलिस की एक टीम जबलपुर पहुंची और स्थानीय थाना पुलिस की मदद से अजय मौर्य को भी हिरासत में ले लिया। पैसों के बदले बांटी जा रही थीं डिग्रियां-
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में पता चला है कि पैसे लेकर कई लोगों को फर्जी डॉक्टर बनाया गया है। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जो फर्जी एमबीबीएस डिग्री और रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराते थे। पुलिस को शक है कि जिले में और भी ऐसे फर्जी डॉक्टर हो सकते हैं।
एक फोन कॉल से खुला सारा राज-
सीएमएचओ डॉ. राजेश अठया ने बताया कि करीब 10 दिन पहले उनके पास एक अनजान शख्स का फोन आया था। उसने बताया कि दमोह के संजीवनी अस्पताल में दो डॉक्टर फर्जी डिग्री पर काम कर रहे हैं। इसके बाद एक कमेटी बनाकर जब कागजों की जांच की गई, तो डिग्रियां नकली निकलीं। इन डॉक्टर्स की नियुक्ति सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल से हुई थी। इसलिए पहले ज्यादा छानबीन नहीं की गई थी। लेकिन जब फोन पर शिकायत मिली और जांच हुई, तो सच सामने आ गया। इसके बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा गया।