नई दिल्ली. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन (ओपीएस) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. हालांकि सरकार पहले ही एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) पेश कर चुकी है, लेकिन अब 8वें वेतन आयोग के गठन से पहले एक अधिक सुरक्षित और अनुमानित सेवानिवृत्ति आय की मांग उठ रही है. कर्मचारी निकायों ने प्रस्ताव दिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को उनके अंतिम आहरित मूल वेतन (बेसिक पे) का 50 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के रूप में मिलना चाहिए, जिसमें महंगाई भत्ता (डीए) भी शामिल हो
एनपीएस कर्मचारियों की नई मांग और प्रस्ताव
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉईज फेडरेशन' (एआईएनपीएसईएफ) ने 8वें वेतन आयोग को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें एनपीएस (एनपीएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए एक निश्चित पेंशन संरचना की मांग की गई है. कर्मचारियों की मुख्य चिंता यह है कि बाजार पर आधारित पेंशन रिटर्न बुढ़ापे में पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रहे हैं.
फेडरेशन के प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन: अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत प्लस महंगाई भत्ता (डीए).
पारिवारिक पेंशन: पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद अंतिम वेतन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा परिवार को दिया जाए.
हाइब्रिड मॉडल: सरकार के वर्तमान 14 प्रतिशत योगदान को बरकरार रखते हुए बाजार आधारित रिटर्न और गारंटीड लाभों को जोड़ा जाए.
एनसी-जेसीएम की बैठक में कर्मचारी कल्याण पर चर्चाएं
इन मांगों के बीच, 11 मई को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) की 49वीं बैठक आयोजित की गई. यह बैठक जेसीएम ढांचे के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में डायमंड जुबली वर्ष के रूप में मनाई गई, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बैठक के दौरान कर्मचारियों से संबंधित 24 एजेंडा मदों पर विस्तृत चर्चा हुई. जिसमें पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे.
पेंशन सुधारों का वर्तमान परिदृश्य
गौरतलब है कि एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) 1 अप्रैल, 2025 से पहले ही लागू हो चुकी है, जो पात्र कर्मचारियों को कुछ शर्तों के साथ सुनिश्चित पेंशन का विकल्प देती है. इसके बावजूद, कई कर्मचारी समूह बाजार की अस्थिरता को देखते हुए एक अधिक स्पष्ट और व्यापक गारंटीड तंत्र की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं. फिलहाल, सरकार ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी गई इस नई मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन जिस तरह से कर्मचारी संगठन लामबंद हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में पेंशन का मुद्दा सरकार के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बना रहेगा.
