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एमपी-यूपी के 70 युवकों से रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी, बर्खास्त रेल कर्मचारी ने अखबारों में विज्ञापन निकलवाकर रचा खेल

गोरखपुर. रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 70 युवकों से ठगी के मामले में पुलिस ने रेलवे के बर्खास्त कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि रेलवे से बर्खास्त कर्मचारी दीपक कुमार सिंह ने एक प्राइवेट विज्ञापन जारी कराया और फिर ऑनलाइन रुपये लेकर युवकों को 23 मई को इंटरव्यू के लिए बुलाया। युवकों के यांत्रिक कारखाना आने के बाद उन्हें ठगी की जानकारी हुई, जिसके बाद रेलवे के वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी ने शाहपुर थाने तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी।

जानकारी के मुताबिक, 23 मई को एमपी, यूपी सहित कई राज्यों से करीब 70 युवक रेलवे के यांत्रिक कारखाना परिसर में इंटरव्यू देने पहुंच गए। युवकों के हाथ में नियुक्ति और इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज थे, लेकिन कारखाना प्रशासन को इस भर्ती प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पहुंचने पर अधिकारियों को शक हुआ और जांच शुरू की गई।

पूछताछ में सामने आया कि सभी युवकों को एक ही माध्यम से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। जांच में पता चला कि आरोपी दीपक कुमार सिंह ने खुद को रेलवे से जुड़ा अधिकारी बताकर सोशल मीडिया और इंटरनेट माध्यमों से भर्ती का प्रचार कराया था। युवकों को रेलवे में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया और उनसे पंजीकरण, टूल्स तथा अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पांच हजार से दस हजार रुपये तक लिए गए। भुगतान के लिए मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड भेजा जाता था, जिसके माध्यम से रकम जमा कराई जाती थी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दो दिनों के भीतर 60 से 70 युवक इंटरव्यू के लिए यांत्रिक कारखाना पहुंच चुके थे। लगातार अभ्यर्थियों के आने और मामले की जानकारी फैलने के बाद कारखाना प्रशासन सतर्क हो गया। इसके बाद वरिष्ठ कार्मिक अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी थी और इसके पीछे पूर्व रेलकर्मी दीपक कुमार सिंह की भूमिका सामने आई। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

 विश्वास जीतने एचआरएमएस आईडी और पासवर्ड जारी किया

जांच में सामने आया कि आरोपी दीपक कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों का विश्वास जीतने के लिए एचआरएमएस आईडी और पासवर्ड तक साझा किए, जिससे पूरी प्रक्रिया वास्तविक भर्ती जैसी प्रतीत होने लगी। मामले की विभागीय पड़ताल में पता चला कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में लखनऊ स्थित आलमबाग कार्यशाला में कार्यरत था, लेकिन वर्तमान में बर्खास्त किया जा चुका है।

विभागीय दस्तावेजों की भी हो रही जांच

वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी रवि मिश्रा ने बताया कि प्रार्थना पत्रों के माध्यम से रजत जायसवाल एवं अन्य अभ्यर्थियों ने जानकारी दी। उनके व्हाट्सएप पर रेलवे में प्राइवेट भर्ती का विज्ञापन किसी ने भेजा था। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर अभ्यर्थियों ने संपर्क किया। तब उस व्यक्ति ने विभिन्न दस्तावेज लिए और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे जमा करने के लिए कहा।  वरिष्ठ कर्मिक अधिकारी का कहना है कि रेलवे में नौकरी के नाम पर ठग सक्रिय हैं। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और फर्जी वेबसाइट पर "बिना परीक्षा सीधी भर्ती", "तत्काल जॉइनिंग" जैसे विज्ञापन दिखाकर युवाओं को फंसाया जा रहा है। याद रखें, रेलवे में सभी भर्तियां सिर्फ RRB और RRC के जरिए लिखित परीक्षा/इंटरव्यू से होती हैं।

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