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कैट ने पमरे कर्मचारी से 1.38 लाख रुपये से अधिक की वसूली का आदेश किया रद्द, राशि वापस करने के निर्देश

जबलपुर। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर खंडपीठ ने पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर  के एक वरिष्ठ फिटर के वेतन से 1,38,883 रुपये की राशि वसूली करने के रेलवे प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया है। अधिकरण ने रेलवे को आदेश दिया है कि वे आवेदक अर्जुन सिंह यादव के वेतन से अब तक काटी गई पूरी राशि को तीन महीने के भीतर वापस करें।  

यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति अखिल कुमार श्रीवास्तव (न्यायिक सदस्य) एवं माननीय श्रीमती मल्लिका आर्य (प्रशासनिक सदस्य) की पीठ द्वारा मूल आवेदन क्रमांक 1095/2023 पर सुनवाई के बाद पारित किया गया है।  

आवेदक के अधिवक्ता अजय शंकर रायजादा एवं अमित रायजादा ने बताया कि अर्जुन सिंह यादव, पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर मंडल में वरिष्ठ फिटर के पद पर कार्यरत थे। रेलवे प्रशासन ने उनके वेतन निर्धारण में हुई एक पुरानी त्रुटि का हवाला देते हुए दिनांक  26.09.2023 को 1,38,883 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत नवंबर 2023 के वेतन से 8,170 रुपये की पहली किस्त भी काट ली गई थी। आवेदक के अधिवत्ता ने पीठ के समक्ष दलील दी कि रेलवे द्वारा इस वित्तीय वसूली को लागू करने से पहले कर्मचारी को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया था, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफ़ीक मसीह (व्हाइट वाशर) मामले का हवाला देते हुए बताया कि रेलवे का यह कृत्य इस ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप सी और डी) के कर्मचारियों से या सेवा-निवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों से कई वर्षों बाद की जाने वाली वित्तीय वसूली को कानूनन अमान्य और अनुचित माना गया है। 

अधिकरण ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात  पाया कि आवेदक का मामला पूरी तरह से रफ़ीक मसीह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए मापदंडों के दायरे में आता है। ऐसी स्थिति में इतनी बड़ी राशि की वसूली कर्मचारी के लिए अत्यंत कठोर और अन्यायपूर्ण होगी।  केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने रेलवे द्वारा जारी वसूली आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, रेलवे प्रशासन (उत्तरदाताओं) को निर्देशित किया गया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर आवेदक के वेतन से काटी गई पूरी राशि उन्हें वापस लौटाई जाए। 

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