जबलपुर। सदर बाजार के मुख्य मार्ग से जुड़े मेहंदीबाग क्षेत्र में सेना और अन्य विभागों द्वारा किए जा रहे सर्वे ने स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यहां के रहवासियों को यह डर सता रहा है कि इस प्रक्रिया के बाद उन्हें उनके घरों से बाहर कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से छावनी के नागरिक क्षेत्रों को आसपास के स्थानीय निकायों को सौंपने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी बीच सेना ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले बंगलों और बगीचों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।आर्मी स्टेशन सेल, छावनी बोर्ड और रक्षा संपदा कार्यालय की संयुक्त टीम ने मेहंदीबाग स्थित पुराने अनुदान वाले बंगलों का ऑडिट और सर्वे शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने इस कार्रवाई के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। इस टीम में रक्षा संपदा कार्यालय और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। टीम एक-एक घर तक पहुंच रही है और रहवासियों को बताया जा रहा है कि यह जमीन सेना के अधीन है।
नेताओं ने जताया विरोध,बोले,डराया जा रहा
इस पूरी कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है। पूर्व छावनी बोर्ड उपाध्यक्ष अभिषेक चिंटू चौकसे और युवा कांग्रेस नेता राहुल रजक ने इस सर्वे का विरोध किया है। उन्होंने बताया कि सालों से यहां रह रहे परिवारों को डराया जा रहा है जो पूरी तरह से गलत है। जानकारी के अनुसार जबलपुर छावनी क्षेत्र में 29 ऐसे बंगले हैं जो पुराने अनुदान पर दिए गए थे। इनमें से ज्यादातर में नागरिक रह रहे हैं। कुछ बंगले खाली होने या मरम्मत न होने के कारण ढह चुके हैं। इनमें से कुछ को आर्मी स्टेशन सेल ने अपने प्रबंधन में ले लिया है, जबकि कुछ में अभी भी पुराने परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं।
