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जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में बड़ी कार्रवाई, 100 से अधिक डॉक्टरों और नर्सों का अटैचमेंट खत्म

 


जबलपुर। जिला स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से जारी अव्यवस्थाओं, घोटालों और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिले की विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य इकाइयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला कार्यालयों में संलग्नीकरण यानी अटैचमेंट पर काम कर रहे 100 से अधिक डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के नियमित, संविदा और आरकेएस कर्मचारियों का अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। भोपाल मुख्यालय से आए उच्च अधिकारियों द्वारा हाल ही में संजीवनी क्लिनिकों और सरकारी अस्पतालों में मैनपावर की कमी को लेकर की गई समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कमी असल में स्टाफ की नहीं, बल्कि उनके गलत तरीके से किए गए अटैचमेंट की है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद कलेक्टर के निर्णय पर यह सख्त कदम उठाया गया है। अब इन सभी अधिकारी-कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटकर कार्य संभालना होगा। सीएमएचओ कार्यालय ने सभी संस्था प्रभारियों से कार्यमुक्त किए गए कर्मचारियों की संख्या और उनकी मूल उपस्थिति की विस्तृत जानकारी भी मांगी है।

​भोपाल मुख्यालय की समीक्षा बैठक और कलेक्टर का कड़ा रुख

​हाल ही में भोपाल मुख्यालय से आए वरिष्ठ अधिकारियों ने जबलपुर के सरकारी अस्पतालों और संजीवनी क्लिनिकों का निरीक्षण किया था। इस दौरान स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की भारी कमी पाई गई थी। जब अधिकारियों ने इसकी गहराई से पड़ताल की, तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को स्पष्ट रूप से कहा गया कि मैनपावर की कमी का असली कारण मैदानी स्टाफ का जिला मुख्यालयों और अन्य पसंदीदा जगहों पर अटैचमेंट होना है। इस कमी को दूर करने के लिए सभी अटैचमेंट खत्म करने की सलाह दी गई थी। इसके बाद जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर के सामने इस पूरे मामले को रखा गया। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर ने तत्काल समिति के माध्यम से निर्णय लिया और सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी को जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में जारी संलग्नीकरण को समाप्त करने के निर्देश दिए।

​100 से ज्यादा कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त होने से मचा हड़कंप

​कलेक्टर से निर्देश मिलने के बाद बुधवार को सीएमएचओ द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया। इस आदेश के जारी होते ही पूरे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि जिले में 100 से अधिक ऐसे डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी थे जो ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और अपने मूल स्थानों को छोड़कर शहरी क्षेत्रों या जिला कार्यालयों में अटैचमेंट का लाभ ले रहे थे। इस आदेश के बाद अब इन सभी को तुरंत प्रभाव से अपने मूल पदस्थापना स्थल पर जाकर अपनी सेवाएं देनी होंगी। इस फैसले से ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी की समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।

​संस्था प्रभारियों को कार्यमुक्ति और उपस्थिति रिपोर्ट भेजने के निर्देश

​सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, जिले के अंतर्गत समस्त स्वास्थ्य इकाइयों में कार्यरत चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग संवर्ग और अन्य तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के नियमित, संविदा और आरकेएस कर्मचारियों के अटैचमेंट निरस्त किए गए हैं। इसके साथ ही विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी संस्था प्रभारियों को एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। संस्था प्रभारियों को अपने कार्यालय से यह जानकारी अनिवार्य रूप से भेजनी होगी कि उनके यहां से कितने कर्मचारियों का अटैचमेंट खत्म कर उन्हें कार्यमुक्त किया गया है। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों को कार्यमुक्त किया गया है, उन्होंने अपने मूल पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है या नहीं, इसकी पूरी रिपोर्ट भी सीएमएचओ कार्यालय को देनी होगी।

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