संयुक्त मोर्चा के अनुसार नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की अधिसूचना और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत कई वर्गों के शिक्षकों को टीईटी से छूट मिली हुई है। इसके बाद भी विभागीय आदेशों के जरिए नॉन-TET शिक्षकों पर परीक्षा अनिवार्य करना नियमों के विपरीत है। शिक्षक संगठनों ने हाल ही में जारी उन आदेशों को रद्द करने की मांग की हैए जिनके कारण प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षक मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। मोर्चा ने यह भी मांग की है कि शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए। इससे उन्हें पेंशनए ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पूरा अधिकार मिल सकेगा। ज्ञापन में सरकार से इस विषय पर संवेदनशीलता दिखाने और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षकों को राहत देने का आग्रह किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि इन लंबित मांगों पर निर्णय न होने से उनके बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है।