जबलपुर। जबलपुर विकास प्राधिकरण की कमान सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी है और सत्ता के गलियारों में संदीप जैन का नाम पूरी मजबूती के साथ उभरा है। संगठन के उच्च स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद अब केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं शेष रह गई हैं। शहर की राजनीति में इस खबर ने उस वक्त हलचल बढ़ा दी जब यह संकेत मिले कि इस बार प्राधिकरण में केवल एक अध्यक्ष नहीं बल्कि दो उपाध्यक्षों की भी ताजपोशी की जा सकती है। पार्टी इस त्रि-स्तरीय नेतृत्व के जरिए शहर के विकास और राजनीतिक संतुलन को एक साथ साधने की कोशिश में है। रिक्त पदों को भरने की कवायद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है जिससे दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
सत्ता के गलियारों में भारी उठापटक
प्राधिकरण में महत्वपूर्ण पदों के लिए भाजपा के भीतर मचे घमासान ने वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। संदीप जैन के नाम पर सहमति बनने के बाद अब शेष दो पदों के लिए जोर आजमाइश का दौर शुरू हो गया है। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर रसूखदार नेताओं तक सभी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटे हैं। इस मंथन का मुख्य उद्देश्य ऐसे चेहरों का चयन करना है जो विकास कार्यों में गति लाने के साथ-साथ संगठन की विचारधारा को भी मजबूती प्रदान कर सकें। जबलपुर जैसे बड़े केंद्र में विकास की रुकी हुई योजनाओं को दोबारा शुरू करना नए नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी जिसके लिए रणनीतिक स्तर पर तैयारी की जा रही है।
दिग्गजों की साख दांव पर
जेडीए की रेस में शामिल नामों की सूची काफी लंबी और प्रभावशाली है। पूर्व विधायकों व पूर्व मंत्रियों के बीच अपनी जगह बनाने की होड़ मची हुई है। वहीं,अन्य बड़े नेताओं की सक्रियता ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। कई पूर्व पार्षद जो लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं वे भी अपनी दावेदारी को नजरअंदाज नहीं होने देना चाहते। स्थिति यह है कि हर गुट अपने प्रतिनिधि को जेडीए बोर्ड में शामिल कराने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। पूर्व जनप्रतिनिधियों की इस सक्रियता ने शीर्ष नेतृत्व के लिए चयन की प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है क्योंकि किसी एक को चुनने पर दूसरे गुट की नाराजगी का जोखिम बना रहता है।
प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव के संकेत
विकास प्राधिकरण में दो उपाध्यक्षों की संभावित नियुक्ति शहर के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। माना जा रहा है कि शहर के बढ़ते दायरे और लंबित आवासीय परियोजनाओं को देखते हुए कार्यभार बांटने की योजना बनाई गई है। एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष होने से विकास कार्यों की निगरानी मंडल स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। इससे न केवल योजनाओं की फाइलें तेजी से आगे बढ़ेंगी बल्कि आम जनता की समस्याओं का निपटारा भी समय सीमा में हो सकेगा। प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नेतृत्व के इस नए फॉर्मूले पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है जो आने वाले दिनों में धरातल पर दिख सकता है।
सियासी समीकरण साधने पर जोर
इन नियुक्तियों के पीछे आगामी समय के बड़े राजनीतिक लक्ष्यों को भी ध्यान में रखा गया है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि विकास प्राधिकरण के माध्यम से शहर के हर वर्ग तक सीधी पहुंच बनाई जाए। संदीप जैन के नेतृत्व में बनने वाली संभावित टीम में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। यदि पूर्व विधायकों या अनुभवी मंत्रियों को इसमें जगह मिलती है तो इसका सीधा लाभ पार्टी को आगामी चुनावों में मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें उस अंतिम सूची पर टिकी हैं जो किसी भी क्षण जारी हो सकती है। सत्ता और संगठन के इस साझा निर्णय से जबलपुर की विकास यात्रा को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
