निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर सियासी हलचल तेज, संभावित नामों की सूची वायरल
जबलपुर। राजनीतिक गलियारों में इन दिनों निगम और मंडलों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल ही में एक सूची सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई है, जिसने सत्ता और संगठन के भीतर खलबली मचा दी है। इस सूची में कई दिग्गज नेताओं और पूर्व मंत्रियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न आयोगों और विकास प्राधिकरणों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इन नामों पर आधिकारिक मुहर लगा सकती है।
आयोगों और निगमों के लिए प्रस्तावित नाम
विभिन्न महत्वपूर्ण पदों के लिए जो नाम सामने आए हैं, उनमें जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। अनुसूचित जाति आयोग के लिए कैलाश जाटव और अनुसूचित जनजाति आयोग के लिए भगत सिंह नेताम का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसी प्रकार युवा आयोग की कमान प्रवीण शर्मा को सौंपी जा सकती है। लघु उद्योग निगम के लिए विनोद गोटिया और मध्य प्रदेश वेयर हाउसिंग के लिए संजय नगाइच के नाम की चर्चा है। कटनी विकास प्राधिकरण के लिए शशांक श्रीवास्तव, ओरछा विकास प्राधिकरण के लिए अखिलेश अयाची और वित्त विकास निगम के लिए दीपक सक्सेना का नाम संभावितों में शामिल है।
प्राधिकरणों में अध्यक्ष पद की दौड़
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों के विकास प्राधिकरणों में भी नई नियुक्तियों के संकेत मिले हैं। चर्चाओं के अनुसार भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के लिए चेतन सिंह, इंदौर के लिए हरिनारायण यादव और जबलपुर के लिए संदीप जैन के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। इसके साथ ही कोल विकास प्राधिकरण के लिए पूर्व विधायक रामलाल रौतेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। इन पदों पर अनुभवी चेहरों को जगह देकर शहरी विकास की गति को तेज करने की रणनीति तैयार की गई है।
पूर्व मंत्रियों और विधायकों को मिल सकती है जिम्मेदारी
प्रसारित सूची में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं जो पूर्व में मंत्री रह चुके हैं या वर्तमान में विधायक के रूप में सक्रिय हैं। इनमें पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, रामनिवास रावत, उमाशंकर गुप्ता, कमल पटेल, रामपाल सिंह, अंचल सोनकर और इमरती देवी के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह तथा वर्तमान विधायक अभिलाष पांडे, आशीष शर्मा, अजय विश्नोई, शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया को भी किसी न किसी मंडल या निगम में समायोजित किया जा सकता है। इन नियुक्तियों के माध्यम से असंतोष को दूर करने और सांगठनिक मजबूती प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।
