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अदालती आदेश की नाफरमानी पर डीजीपी तलब, अवमानना मामले में हाईकोर्ट सख्त



जबलपुर।  मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सागर की जेएन पुलिस अकादमी में पदस्थ महिला व्याख्याता के नियमितीकरण संबंधी आदेश का पालन न होने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर पूर्व के निर्देशों का क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना और अकादमी के निदेशक प्रमोद वर्मा को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर होना होगा। यह प्रकरण डॉ. चंद्रप्रभा जैन से जुड़ा है, जो लंबे समय से अपनी सेवाओं को नियमित कराने के लिए कानूनी संघर्ष कर रही हैं। शासन की ओर से आदेश तामीली में बरती जा रही ढिलाई को देखते हुए न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अंतिम अवसर प्रदान किया है।

व्याख्याता की नियुक्त का है मामला

डॉ. चंद्रप्रभा जैन को जे.एन. पुलिस अकादमी सागर में व्याख्याता के पद पर नियुक्त किया गया था। सेवा अवधि बीतने के बाद भी जब उन्हें नियमित नहीं किया गया, तो उन्होंने अपने हक के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने 12 जनवरी 2024 को डॉ. जैन के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए उन्हें नियमित करने का आदेश पारित किया था। इस फैसले के बावजूद गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के स्तर पर प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे प्रार्थिया को न्याय के लिए पुनः अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

​अवमानना याचिका की सुनवाई पर सख्ती

प्रार्थी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर 24 अप्रैल 2026 को सुनवाई के दौरान शासन के अधिवक्ताओं ने अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय की मांग की। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लंबे समय से आदेश लंबित है और अब और अधिक रियायत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति ने आगामी 11 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तिथि तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी कर शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों को खुद कोर्ट में आकर जवाब देना होगा।

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की सुगबुगाहट

उच्च न्यायालय के इस कड़े आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग के अधिकारियों में सक्रियता बढ़ गई है। पूर्व के आदेशों की अनदेखी के कारण अब डीजीपी और अकादमी निदेशक जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों पर सीधे कोर्ट में पेशी की तलवार लटक रही है। 15 दिन की इस समय सीमा के भीतर विभाग को अब डॉ. चंद्रप्रभा जैन के नियमितीकरण की फाइल को अंतिम रूप देना होगा। यदि प्रशासनिक स्तर पर अब भी देरी हुई तो अफसरों को न्यायालय की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।

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