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पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन : कहा- महिला आरक्षण पर विपक्ष ने की नारी शक्ति की भ्रूण हत्या

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने विशेष संबोधन में एक बहुत ही भावुक और कड़ा संदेश दिया है. संसद में महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न हो पाने पर पीएम मोदी ने देश की करोड़ों माताओं और बहनों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी. उन्होंने कहा कि एक बेटे और एक भाई के रूप में वह बेटियों के अधिकारों की लड़ाई लडऩे के लिए पूरी ईमानदारी से आगे बढ़े थे, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थों ने इस नेक राह में बड़े रोड़े अटका दिए.

पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें 

1. विपक्ष पर नारी शक्ति की भ्रूण हत्या का आरोप

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इन दलों के लिए देश का हित नहीं, बल्कि अपने परिवार और पार्टी का हित सर्वोपरि है. मोदी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि इन परिवारवादी पार्टियों ने संसद के भीतर महिला अधिकारों की भ्रूण हत्या कर दी है. उन्होंने कहा कि कल जब पूरा देश उम्मीद भरी नजरों से संसद की ओर देख रहा था, तब इन दलों ने एकजुट होकर नारी शक्ति के सपनों को कुचलने का काम किया. पीएम ने जनता को आगाह किया कि जो लोग महिलाओं के अपमान पर जश्न मनाते हैं, उन्हें आने वाले समय में देश की आधी आबादी कभी माफ नहीं करेगी.

 2. नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व

पीएम मोदी ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं था, बल्कि यह पिछले 40 साल से लटके हुए महिलाओं के हक को दिलाने का एक पवित्र प्रयास था. यह संशोधन 21वीं सदी की भारतीय नारी को नई उड़ान देने और उनके रास्ते की हर बाधा को हटाने के लिए लाया गया था. सरकार का लक्ष्य था कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं को उनका पूरा अधिकार मिले ताकि वे भारत की विकास यात्रा में बराबर की हिस्सेदार बन सकें. यह बदलाव उत्तर से लेकर दक्षिण तक हर राज्य की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनिवार्य था, लेकिन विपक्षी दलों ने तकनीकी पेचों और झूठ का सहारा लेकर इसे रोकने की कोशिश की.

3. परिवारवाद और अंग्रेजों की नीति का आरोप

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए कहा कि यह पार्टी आज भी अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति पर चल रही है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाया और राज्यों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की. मोदी ने दावा किया कि इन परिवारवादी पार्टियों को असल में डर है कि अगर सामान्य परिवारों की महिलाएं सशक्त होकर राजनीति में आ गईं, तो उनका खानदानी नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा. वे चाहते हैं कि सत्ता केवल उनके ही परिवारों तक सीमित रहे. यही कारण है कि वे हर उस सुधार का विरोध करते हैं जो आम नागरिक को ताकतवर बनाता है.

4. सुधारों के प्रति कांग्रेस का पुराना रवैया

अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही सुधार विरोधी रही है. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पूर्व में जनधन योजना, आधार, डिजिटल इंडिया और ट्रिपल तलाक जैसे कानूनों का भी इन्हीं लोगों ने विरोध किया था. कांग्रेस की कार्यशैली हमेशा से लटकाना, अटकाना और भटकाना रही है, जिसकी वजह से भारत विकास की दौड़ में पीछे रहा.

5. पीएम ने लिया संकल्प

मोदी ने संकल्प लिया कि भले ही आज इस राह में बाधा आई है, लेकिन वह हार नहीं मानेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि देश की नारी शक्ति अब जाग चुकी है और वह अपने अधिकारों को रोकने वालों को कड़ा सबक जरूर सिखाएगी

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