जबलपुर। जिले में नई आबकारी नीति के लागू होने के साथ ही शराब कारोबारियों और विभाग के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो गई है। भीषण गर्मी के दौरान बीयर की भारी मांग होने के बावजूद ठेकेदारों को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल पा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि आबकारी विभाग के स्थानीय अधिकारी चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं, जबकि अन्य दुकानों पर स्टॉक की कमी बनी हुई है। करोड़ों रुपये की लाइसेंस फीस और ऊंचे दामों पर ठेके लेने के बाद अब शराब कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नया वित्त वर्ष शुरू हुए 19 दिन बीतने के बाद भी आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी है।
चहेते ठेकेदारों पर मेहरबानी,ऑनलाइन नियमों को ठेंगा
शराब कारोबारियों ने अधिकारियों पर वितरण प्रणाली में पारदर्शिता न बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिले की 143 शराब दुकानों के लिए निर्धारित ऑनलाइन स्टॉक आवंटन प्रक्रिया को दरकिनार कर पसंदीदा लोगों को बीयर मुहैया कराई जा रही है। नियमतः पोर्टल पर मांग दर्ज करने वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन तकनीकी खामियों और स्टॉक खत्म होने का हवाला देकर सामान्य ठेकेदारों को लौटा दिया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि जब ऑनलाइन मांग पत्र भरे जाते हैं, तो अधिकारियों के करीबी लोगों को तत्काल स्टॉक आवंटित कर दिया जाता है, जिससे आम ठेकेदारों के निवेश पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है।
कर्ज के बोझ से दबे शराब कारोबारी
इस वर्ष जबलपुर में शराब दुकानों का आवंटन पिछले साल की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत अधिक राशि पर हुआ है। सरकार का राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से ठेकेदारों ने बाजार से भारी ब्याज पर कर्ज लेकर और बड़ी पूंजी निवेश कर दुकानें संचालित की हैं। सीजन के शुरुआती दौर में ही मांग के अनुरूप बीयर और अन्य मदिरा उपलब्ध न होने से बैंक की किश्तें और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करना मुश्किल हो रहा है। ठेकेदारों का तर्क है कि यदि आपूर्ति श्रृंखला में सुधार नहीं हुआ, तो वे व्यापार चलाने में असमर्थ होंगे। वर्तमान में स्थिति यह है कि कई दुकानों पर एक पेटी बीयर भी उपलब्ध नहीं है।
कलेक्टर से शिकायत करने की तैयारी
विभागीय उदासीनता और पक्षपातपूर्ण रवैये से क्षुब्ध होकर जिले के शराब ठेकेदारों ने अब सामूहिक रणनीति तैयार की है। कारोबारियों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों को जमीनी हकीकत से अवगत कराए जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आपूर्ति में सुधार न होने और सौतेले व्यवहार के विरोध में सभी ठेकेदार जल्द ही कलेक्टर से मुलाकात कर विस्तृत शिकायत दर्ज कराएंगे। ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी समस्याओं का निराकरण कर पारदर्शी वितरण प्रणाली सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे शासन के उच्च स्तर पर विरोध दर्ज कराते हुए बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
