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भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक रवीन्द्र शर्मा के विचारों पर विमर्श,देखें वीडियो



भारत गाथा और भारत कथा श्रृंखलाओं के अंतर्गत 15 पुस्तकें प्रकाशित,जीविका आश्रम के संस्थापक आशीष गुप्ता हैं मुख्य संपादक

जबलपुर। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रख्यात विचारक स्वर्गीय रवीन्द्र शर्मा की बातचीतों पर आधारित 15 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ। यह आयोजन केंद्र के कलाकोश प्रभाग द्वारा आयोजित किया गया था। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्स्मरण और उसे समकालीन संदर्भों में स्थापित करना था। इन 15 पुस्तकों को भारत गाथा और भारत कथा नामक दो भिन्न श्रृंखलाओं के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है।

आशीष गुप्ता ने संभाला संपादन का दायित्व

​कार्यक्रम की शुरुआत जीविका आश्रम,इंद्राना के संस्थापक आशीष गुप्ता के वक्तव्य से हुई। उन्होंने इस संपूर्ण ग्रंथावली के संकलन और संपादन का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व संभाला है। उन्होंने गुरुजी के व्यक्तित्व की गहराई और उनकी सूक्ष्मताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके ज्ञान के विभिन्न पहलुओं को साझा किया।

विद्वानों ने गुरुजी के विचारों पर डाला प्रकाश

​समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज विद्वानों ने भाग लिया और गुरुजी के विचारों पर अपनी राय रखी। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति राणा प्रताप सिंह ने विज्ञान के उदाहरणों के माध्यम से गुरुजी के वचनों को एक नई दृष्टि प्रदान की। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने गुरुजी द्वारा प्रतिपादित आधारभूत ज्ञान परंपरा के दर्शन को अतुलनीय बताया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने गुरुजी के विचारों का सामाजिक संरचना, विशेषकर जाति व्यवस्था के संदर्भ में विश्लेषण किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेश सोनी ने गुरुजी द्वारा समाज को दिए गए संवादों के महत्वपूर्ण आयामों को सार्थक रूप में प्रस्तुत किया। लोकार्पण सत्र का संचालन कलाकोश विभागाध्यक्ष प्रो. सुधीर लाल द्वारा किया गया।

भारत गाथा और भारत कथा श्रृंखलाओं पर चर्चा

​समारोह के अगले सत्रों में प्रकाशित पुस्तकों पर विस्तृत चर्चाएं आयोजित की गईं। भारत गाथा पुस्तक श्रृंखला के अंतर्गत प्रकाशित 10 पुस्तकों पर चर्चा के दौरान, हरिजन सेवक संघ गांधी आश्रम के उपाध्यक्ष लक्ष्मी दास ने गुरुजी की भिक्षावृत्ति, प्रौद्योगिकी, और घर एवं वास्तु पुस्तकों पर अपनी राय रखी। आईआईटी दिल्ली के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. विजय चेरियर ने गुरुजी की कला एवं डिजाइन, ग्राम व्यवस्था, और जाति व्यवस्था पुस्तकों पर चर्चा की। लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुल सचिव प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने गुरुजी की शिक्षा व्यवस्था और समाज व्यवस्था पुस्तकों पर अपनी बातें प्रस्तुत की।

वृत्तचित्र प्रदर्शन के साथ संगोष्ठी का समापन

​भारत कथा पुस्तक श्रृंखला वाले सत्र में सेवा इंटरनेशनल के पूर्व कार्यकारी निदेशक आर. के. अनिल, जीविका आश्रम, इंद्राना के संस्थापक आशीष गुप्ता और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रोफेसर मो. महताब आलम रिज़वी ने गुरुजी की पुस्तकों मसूरी संवाद, आदिलाबाद संवाद और बिजनौर संवाद पर अपनी बात रखी। एक दिवसीय संगोष्ठी का समापन गुरुजी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर निर्मित 45 मिनट के वृत्तचित्र क्रांतदर्शी गुरुजी के प्रदर्शन के साथ हुआ।

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