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एमपी कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती भ्रष्टाचार में दोषी करार, कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेजा

नई दिल्ली/भोपाल. एमपी कांग्रेस को दिल्ली की एमपी/एमएलए कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली में गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। भारती को साल 2015 के भूमि विकास सहकारी बैंक में हुए भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली की कोर्ट ने दोषी पाया। 

विधायक ने अपनी मां के नाम से सहकारी बैंक में करीब 10 लाख 50 हजार की एफडी 3 साल के लिए कराई थी। उन्हें इसके बदले 13 प्रतिशत ब्याज भी मिल रहा था। हालांकि, बाद में विधायक ने इस अवधि को 3 साल से बढाकर 15 साल कर दिया गया। इस पर बैंक के कर्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। एमपी एमएलए कोर्ट ने शिकायत को गंभीरता से लिया और इसे धोखाधड़ी का मानकर केस दर्ज करने के आदेश दिए।

एमएलए की बैंक कर्मचारी ने की थी शिकायत

इस पूरे मामले की शिकायत बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में दर्ज कराई थी। शिकायत में नरेंद्र ने बताया कि एफडी की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और दस्तावेजों में हेरफेर की गई। अदालत ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ और सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट के समक्ष पेश किए गए सबूत और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी पाया। अब सजा को लेकर अगली सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा।

27 साल पुराना है मामला

मामला 27 साल पुराना है। अगस्त 1998 में राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने जिला सहकारी ग्रामिक विकास बैंक में 3 साल के लिए 10 लाख की एफडी 13.50त्न के बयाज पर कराई थी। उस समय भारती विधायक होने के साथ बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष भी थे। यही नहीं वे अपने पिता के नाम पर बने श्याम सुंदर श्याम जनसहयोग एवं सामुदायिक विकास संस्थान से भी जुड़े हुए थे। कोर्ट में बताया गया गया कि राजेंद्र भारती ने अपने पद और अधिकारों का दुरूपयोग कर बैंक कर्मचारी रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर बैंक दस्तावेजों में हेरफेर और काट छांट कर एफडी की अवधि को 3 साल से बढ़वाकर पहले 10 साल और फिर 15 साल करवा लिया। अभियोजन के अनुसार विधायक का उद्देशय अपनी मां और संस्थान को ब्याज का लाभ पहुंचाना था।

कल होगा सजा का ऐलान

दिल्ली की विशेष एमपी/एमएल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद, मामले की सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। अदालत आरोपियों की सजा तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। अभियोजन पक्ष कठोर सजा की मांग कर सकता है, जबकि बचाव पक्ष आरोपी के सामाजिक और राजनीतिक रिकॉर्ड, बीते समय की लंबाई और अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी की अपील कर सकता है।


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