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पमरे विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को हाईकोर्ट ने किया निरस्त

 कहा- सरकारी कर्तव्य के दौरान की गई कार्रवाई पर बिना विभाग की मंजूरी के मुकदमा चलाना अवैध

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने पश्चिम मध्य रेलवे सतर्कता विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को दोहराया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन के दौरान कोई कार्य करता है, तो उसके विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति  लेना अनिवार्य है। 

यह मामला वर्ष 2011 का है, जब पश्चिम मध्य रेलवे के सतर्कता निरीक्षकों ने एक ट्रेन में टिकट निरीक्षक प्यार सिंह मीणा के कार्य की जांच की थी। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। इस संबंध में जीआरपी कटनी में धारा 294, 323, 506 और 34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

माननीय न्यायमूर्ति बी. पी. शर्मा ने याचिकाकर्ताओं की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि कथित घटना उस समय हुई जब अधिकारी ट्रेन में आधिकारिक सतर्कता जांच कर रहे थे । चाहे भले ही कोई कार्य कर्तव्य की सीमा से अधिक किया गया हो, यदि उसका संबंध आधिकारिक ड्यूटी से है तो धारा 197 सीआरपीसी का संरक्षण प्राप्त होगा । माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 197 के तहत मंजूरी केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अधिकार क्षेत्र की शर्त है। बिना मंजूरी के ऐसी कार्यवाही शुरू करना कानूनन गलत है। 

जांच रिपोर्ट में विरोधाभास

कोर्ट ने पाया कि  पूर्व में  जींआरपी थाना जबलपुर एवं पुलिस अधीक्षक (रेल) द्वारा की गई जांच में इन अधिकारियों को निर्दोष पाया था और केवल एक अन्य अधिकारी सुभाष यादव को दोषी माना गया था. न्यायालय ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि घटना कटनी/जबलपुर की थी, लेकिन शिकायत तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक रीवा गाजीराम मीणा के हस्तक्षेप पर कटनी में दर्ज की गई थी, जिनका जीआरपी थाना कटनी पर कोई क्षेत्र अधिकार नहीं था। माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध जीआरपी थाना कटनी में दर्ज अपराध क्रमांक 44/2012 और उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया और माना कि यह मामला कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग था और इसे दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय रायजादा एवं अंजना श्रीवास्तव  ने यह भी बताया कि इस प्रकरण में एक ऐसे अधिकारी के विरुद्ध भी प्रकरण दर्ज कर लिया जो स्वीकृत अवकाश पर था।

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