जबलपुर। जिले की चारघाट ग्राम पंचायत में सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी का मामला सामने आया है। मनोज अग्रवाल की शिकायत की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने शासकीय नियमों को दरकिनार कर 91,156 रुपये की राशि का गबन किया है। इस पूरे घोटाले की जांच सहायक विकास खंड विस्तार अधिकारी अमरेश गिरी और अनिल कुमार झारिया द्वारा की गई थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार पंचायत में बिना किसी वैधानिक प्रस्ताव या निविदा प्रक्रिया के फर्जी वेंडर नियुक्त किए गए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि न तो इन खर्चों का अनुमोदन पंचायत की बैठक में लिया गया और न ही भुगतान के लिए अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
फर्जी बिलों से निजी खातों में राशि का हस्तांतरण
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कई दुकानों के नाम से बिल लगाए गए थे, लेकिन भौतिक रूप से किसी भी सामग्री की खरीदी नहीं की गई थी। जब जांच दल ने संबंधित दुकानदारों से संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पंचायत ने उनसे कोई सामान नहीं लिया। इसके बावजूद फर्जी बिलों के आधार पर सरकारी राशि का भुगतान कृष्णा प्रजापति और अमित जैन नामक व्यक्तियों के निजी बैंक खातों में कर दिया गया। वर्तमान सचिव सुधा नायर द्वारा जांच समिति को आवश्यक कैशबुक और बिल वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसे रिकॉर्ड गायब करने की साजिश के तौर पर देखा जा रहा है। जबकि पूर्व सचिव रश्मि पासी पहले ही प्रभार सूची सौंप चुकी थीं।
जिम्मेदारों पर वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई
इस वित्तीय गबन के मामले में सरपंच केशर बाई ने अपना पल्ला झाड़ते हुए सारा दोष सचिव पर मढ़ा है। सरपंच का तर्क है कि उन्हें भुगतान की तकनीकी जानकारी नहीं थी, हालांकि पंचायत राज अधिनियम के तहत वित्तीय अनियमितता के लिए सरपंच की जवाबदेही भी तय होती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब पूर्व सचिव रश्मि पासी से गबन की गई 91,156 रुपये की राशि वसूल करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही वर्तमान सचिव सुधा नायर के खिलाफ भी गंभीर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता बरतने के कारण विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। वर्तमान में यह पूरा प्रकरण जिला पंचायत के पास अंतिम फैसले के लिए विचाराधीन है, जिससे पंचायत स्तर पर मचे भ्रष्टाचार के खेल पर लगाम लगने की उम्मीद है।
