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नगर निगम के अफसर और ठेकेदार रच रहे हरियाली का ढोंग!

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, चहेते ठेकेदारों की चांदी

जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संभावित नगर प्रवास को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। रानी अवंती बाई वार्ड के अंतर्गत गौरैया घाट और गौर नदी के समीप एक गार्डन के भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के शामिल होने की चर्चाएं हैं। इस प्रस्तावित दौरे को देखते हुए नगर निगम का अमला शहर की व्यवस्थाओं को सुधारने के बजाय दिखावे की कवायद में जुट गया है। विशेष रूप से उद्यान विभाग द्वारा बिलहरी से लेकर गौर एकता मार्केट तक के डिवाइडरों पर आनन-फानन में पौधारोपण का कार्य प्रारंभ किया गया है। ये पौधरोपण विशुद्ध रूप से धाँधली की बानगी बन गया है। ये हरियाली कितने दिन टिकेगी,ये कोई रहस्य नहीं है। 

​गर्मी में पौधारोपण पर उठे सवाल


भीषण गर्मी के इस मौसम में जब पौधों को जीवित रखना एक बड़ी चुनौती होती है, तब मुख्य मार्ग के डिवाइडरों पर नए पौधे लगाना चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि सामान्यतः मानसून के दौरान या उससे ठीक पहले पौधारोपण किया जाता है ताकि पौधों को प्राकृतिक नमी मिल सके। वर्तमान में पारा ऊंचाइयों पर है और इस स्थिति में पौधों के सूखने की पूरी संभावना बनी रहती है। विभागीय सूत्रों की मानें तो भोपाल मुख्यालय से इस विशेष मार्ग पर पौधारोपण के संबंध में कोई लिखित दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं, इसके बावजूद स्थानीय अधिकारियों के निर्देश पर यह कार्य युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है।

​छोटे टेंडरों से उपकृत करने की खुराफात


प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य के पीछे की मंशा पर भी उंगलियां उठ रही हैं। चर्चा है कि मुख्यमंत्री के आगमन की आड़ में बड़े कार्यों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर फाइलों को आगे बढ़ाया जा रहा है। विभागीय नियमों के अनुसार बड़े टेंडर की प्रक्रिया जटिल होती है, इसलिए कथित तौर पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यों को विभाजित कर सीधा कार्यादेश जारी करने की जुगत लगाई जा रही है। उद्यान विभाग के प्रभारी स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि कागजी खानापूर्ति जल्द पूरी हो सके और वित्तीय सत्र के बजट का उपयोग किया जा सके।

​सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका

​इस पूरे घटनाक्रम में सरकारी खजाने की फिजूलखर्ची का मुद्दा भी गरमाता जा रहा है। बिलहरी से गौर एकता मार्केट तक के मार्ग पर किए जा रहे इस सौंदर्यीकरण कार्य में लाखों रुपये व्यय होने का अनुमान है। स्थानीय नागरिकों और सूत्रों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री का दौरा टल जाता है या बदल जाता है, तो इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होगा। भीषण लू और पानी की कमी के कारण ये पौधे कुछ ही दिनों में नष्ट हो सकते हैं। अधिकारियों की यह कार्यप्रणाली विकास के बजाय केवल तात्कालिक वाहवाही बटोरने और अपने करीबियों को फायदा पहुंचाने वाली नजर आ रही है।

​अधिकारियों के दबाव में निचला अमला

​उद्यान विभाग के भीतर भी इस निर्णय को लेकर दो फाड़ की स्थिति है। कुछ निचले स्तर के कर्मचारी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि प्रतिकूल मौसम में पौधों को जमीन में रोपना उनकी मौत के वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा है। अधिकारियों के दबाव में नर्सरी से पौधे निकालकर सड़कों के किनारे लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल की आड़ लेकर नियम-कायदों को किनारे रखा जा रहा है। फिलहाल गौर नदी किनारे प्रस्तावित गार्डन की जमीन की साफ-सफाई और अन्य निर्माण कार्यों को भी तेजी से निपटाया जा रहा है ताकि मुख्यमंत्री के समक्ष विभाग की सक्रियता की एक उज्ज्वल छवि प्रस्तुत की जा सके।

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