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जबलपुर: बड़े गांव से महानगर की ओर बढ़ते जबलपुर के विकास दावों पर विपक्षी घेराबंदी

बजट सत्र के दूसरे दिन बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर मंथन

जबलपुर। नगर निगम बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में विकास कार्यों और वित्तीय प्रावधानों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। सत्तापक्ष ने जहाँ शहर की बदलती तस्वीर और आगामी हजारों करोड़ की योजनाओं का खाका खींचा, वहीं विपक्ष ने जमीनी स्तर पर इन दावों की सत्यता को लेकर घेराबंदी की। करीब 2200 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट के इर्द-गिर्द घूमती यह चर्चा बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता रैंकिंग और भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर केंद्रित रही।

​नगर निगम की वित्तीय खाका व बजट आवंटन

​नगर निगम प्रशासन ने चालू वित्त वर्ष के लिए 2200 करोड़ रुपए का वित्तीय रोडमैप तैयार किया है। इस राशि का मुख्य हिस्सा शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और लंबित परियोजनाओं को गति देने के लिए आवंटित किया गया है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने सदन में जानकारी दी कि राजस्व संग्रह के मामले में निगम ने ऐतिहासिक आंकड़े छुए हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क निर्माण, नाली नेटवर्क और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए बड़े पैमाने पर बजट का प्रावधान रखा गया है ताकि नागरिक सेवाओं में सुधार हो सके।

​बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर

​शहर के भौतिक स्वरूप को आधुनिक बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक निवेश किया है। महापौर के अनुसार लगभग 650 करोड़ रुपए की राशि केवल नालों, नालियों और सड़कों के संजाल को व्यवस्थित करने पर खर्च की गई है। इसके अतिरिक्त 100 करोड़ रुपए की लागत से सार्वजनिक उद्यानों का सौंदर्यीकरण और कायाकल्प किया जा रहा है। जल आपूर्ति की व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से 50 करोड़ रुपए और शहर की प्रकाश व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 20 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। वर्तमान में शहर के विभिन्न वार्डों में करीब 1000 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य संचालित किए जा रहे हैं।

​स्वच्छता और पर्यावरण में अर्जित उपलब्धियां

​सदन की कार्यवाही के दौरान शहर की राष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान का उल्लेख किया गया। प्रशासन की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक स्वच्छता सर्वेक्षण में जबलपुर ने देश भर में 5वां स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता के मानकों पर शहर ने देश में दूसरा स्थान हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सत्तापक्ष ने इन उपलब्धियों को निगम की सक्रियता और बेहतर प्रबंधन का परिणाम बताया। प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन की दिशा में किए गए नवाचारों को इन उपलब्धियों का मुख्य आधार माना गया है।

​भविष्य की कार्ययोजना और मेगा प्रोजेक्ट्स

​आगामी समय के लिए नगर निगम ने निवेश के बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने घोषणा की कि अगले डेढ़ साल के भीतर शहर के विभिन्न हिस्सों में 3000 करोड़ रुपए के नए विकास कार्यों की आधारशिला रखी जाएगी। उन्होंने सदन को बताया कि जबलपुर अब अपनी पुरानी पहचान छोड़कर महानगर बनने की दिशा में अग्रसर है। इन परियोजनाओं में स्मार्ट सिटी के तहत होने वाले कार्य और उपनगरीय क्षेत्रों के विस्तार की योजनाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शहर की बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करना है।

​विपक्ष द्वारा प्राथमिकताओं पर दागे प्रश्न

​विपक्ष ने बजट के आंकड़ों और दावों पर असहमति जताते हुए इसे वास्तविकता से परे बताया। नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने सदन में कहा कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी सड़कों और जल निकासी की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का आवंटन और उसकी रणनीति स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण आम जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विपक्ष ने मांग की कि केवल कागजों पर आंकड़े प्रस्तुत करने के बजाय जमीनी स्तर पर सुधार दिखना चाहिए ताकि करदाताओं के पैसे का सही उपयोग हो सके।

​विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति 

​सदन में चर्चा का समापन शहर के सर्वांगीण विकास की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विकास की गति को बनाए रखने के लिए तकनीकी सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता पर ध्यान दिया जा रहा है। सत्तापक्ष ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में जबलपुर के बुनियादी ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलेगा। वहीं विपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय सीमा का ध्यान नहीं रखा गया, तो बजट के उद्देश्य विफल हो जाएंगे। सदन में दोनों पक्षों ने शहर के हित को प्राथमिकता देने की बात कही।

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