साहित्य साधना का उत्सव: वर्तिका के मंच से हुआ दो नवीन पटलों का श्रीगणेश
जबलपुर। साहित्य प्रेमियों के समागम के बीच वर्तिका संस्था द्वारा मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अर्चना द्विवेदी और उर्मिला श्रीवास्तव के काव्य पटल का लोकार्पण रहा। शहर के प्रबुद्ध साहित्यकारों की मौजूदगी में आयोजित इस गोष्ठी में प्रकृति, पर्यावरण, अध्यात्म और समसामयिक विषयों पर केंद्रित रचनाओं का पाठ किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए जन जागरण में लेखनी की भूमिका को महत्वपूर्ण रेखांकित किया।
अतिथियों ने सृजन को बताया राष्ट्र विकास का आधार
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि विजय बागरी रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र मिश्रा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सुरेन्द्र लाल साहू उपस्थित रहे। अतिथियों ने सामूहिक रूप से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समरसता के लिए साहित्य एक सशक्त माध्यम है। ज्वलंत राष्ट्रीय समस्याओं पर जनचेतना जागृत करने के लिए कवियों का लेखन प्रभावी भूमिका निभाता है। राजेश पाठक प्रवीण ने अपने संबोधन में सार्थक सृजन को जीवन की आंतरिक औषधि की संज्ञा दी।
संगठनात्मक गतिविधियां और काव्य पटल के महत्व पर चर्चा
संयोजक विजय नेमा ने वर्तिका संस्था द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। अध्यक्ष संतोष नेमा ने काव्य पटल की महत्ता समझाते हुए बताया कि यह रचनाकारों की अभिव्यक्ति को स्थायित्व प्रदान करने का एक बेहतर प्रयास है। कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योति मिश्रा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके पश्चात प्रतिमा अखिलेश ने कुशलतापूर्वक मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाली। लोकार्पण के पश्चात सभी उपस्थित जनों ने रचनाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कवियों की रचनाधर्मिता से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
गोष्ठी के द्वितीय चरण में शहर के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी प्रभावी कृतियों का पाठ किया। काव्य पाठ करने वालों में विजेंद्र उपाध्याय, मनोज शुक्ला, सुशील श्रीवास्तव, प्रभा खरे, डॉ. सलमा जमाल, विवेक गुप्ता और अमर वर्मा शामिल रहे। इनके अतिरिक्त विजय सिन्हा, मनोज मित्र, हीरालाल बड़गइयाँ, कालिदास ताम्रकार, द्वारका गुप्त, रजनी कोठारी, प्रीति नामदेव, कमलेश नाहटा, प्रेम पालीवाल, लखन लाल रजक और प्रभा विश्वकर्मा ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। इस अवसर पर शेखर शर्मा, दिवाकर शर्मा, प्रफुल्ल श्रीवास्तव, रमाकांत गौतम, ज्ञानेंद्र द्विवेदी और महेश स्थापक की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में अमरसिंह वर्मा ने आभार व्यक्त किया।
