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संस्कृत और संस्कृति का संरक्षण ही असली राम सेवा, बोले जगद्गुरु रामभद्राचार्य


संस्कारधानी में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ

जबलपुर। गौरीघाट स्थित आयुर्वेद कॉलेज मैदान में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का मंगल आयोजन प्रारंभ हुआ। पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने 1419 वीं राम कथा के प्रथम दिन प्रभु श्रीराम के प्राकट्य के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान का अवतार केवल संतों और देवताओं की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण जगत के कल्याण और मंगल के लिए होता है। महाराजश्री ने स्पष्ट किया कि श्रीराम माया और इंद्रियों से परे हैं और उन्होंने भक्तों के प्रेम के वशीभूत होकर स्वयं को प्रकट किया है। उन्होंने रावण द्वारा फैलाए गए अमंगल को समाप्त करने हेतु प्रभु के अवतार को अनिवार्य बताया।

​नर्मदा की निर्मलता और श्रीराम नाम के आठ सिद्धांत

​कथा के दौरान महाराजश्री ने मां नर्मदा की महिमा और श्रीराम की सुंदरता का अनूठा वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नर्मदा संसार की वासनाओं का खंडन करने वाली नदी हैं, जो श्रीराम के अलौकिक स्वरूप को देखकर मोहित हो गयीं। श्रीराम शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि रा का अर्थ देना और म का अर्थ मंगल है, अर्थात जो सदैव मंगल प्रदान करें वही राम हैं। परमात्मा को समझने के लिए उन्होंने व्याकरण, उपमाना, कोष और व्यवहार जैसे 8 सिद्धांतों को आवश्यक बताया। उन्होंने घोषणा की कि संस्कृत के संवर्धन के लिए वे चित्रकूट में 14 जनवरी से एक विशिष्ट गुरुकुल का शुभारंभ करेंगे, जहां वैदिक विषयों के साथ अंग्रेजी की शिक्षा भी दी जाएगी।

​सर्व समाज की सहभागिता से दिखी सामाजिक समरसता

​इस धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता मंच पर दिखने वाली सामाजिक समरसता रही। जबलपुर के 41 विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने एक साथ यजमान बनकर इस अनुष्ठान में सहभागिता की। मुख्य यजमान डॉ. राजेश धीरावाणी के साथ सुदर्शन, अहिरवार, बाल्मीक, सोनकर, रजक, चौरसिया, सोनी, कायस्थ, कलचुरी, महाराष्ट्र, बंगाली, अग्रवाल, साहू, राठौर, बेन, तेलगू, पंजाबी, लोधी, कुशवाहा, कोरी, ताम्रकार, प्रजापति, रैकवार, ब्राह्मण, सिंधी, बारी, केशरवानी, खंडेलवाल, कुर्मी, विश्वकर्मा, झारिया, यादव, गहोई, जैन, तमिल, वनवासी, सेन, नामदेव, गुप्ता और क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों ने पूजन अर्चन किया। राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे और अन्य जनप्रतिनिधियों ने जगद्गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।

​कलश यात्रा में दिखे भक्ति के रंग

​कथा प्रारंभ होने से पूर्व गौरीघाट के नावघाट से एक विशाल नर्मदा कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 15 से अधिक झांकियां शामिल थीं, जिसमें हजारों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर सहभागिता की। आयोजन स्थल पर नाट्य संस्था द्वारा भक्तिमती शबरी नाटिका का मंचन किया गया, जिसमें श्रीराम ने शबरी को नवधा भक्ति के सूत्र समझाए। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने भी सपरिवार पहुंचकर आशीर्वाद लिया। महाराजश्री ने चीफ जस्टिस द्वारा अपनी पत्नी को किडनी दान करने के कार्य की सराहना करते हुए इसे दांपत्य संस्कारों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। आयोजन समिति के संदीप जैन, डॉ. जितेंद्र जामदार और अखिल मिश्रा ने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कथा लाभ लेने का आग्रह किया है।

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