रेडियो अधीक्षक के विरुद्ध अधीनस्थ स्टाफ ने खोला मोर्चा, शिकायत की जांच शुरु
जबलपुर। पुलिस वायरलेस नेटवर्क और संचार उपकरणों के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले रेडियो विभाग में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। जबलपुर में पदस्थ रेडियो अधीक्षक सुनील राजौरे की कार्यशैली से व्यथित होकर उनके अधीनस्थ कर्मचारियों ने पुलिस महानिदेशक भोपाल को एक औपचारिक लिखित शिकायत भेजी है। इस शिकायत पत्र में विभाग के पुरुष कर्मचारियों के साथ महिला कर्मचारी भी एकजुट नजर आ रही हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि अधीक्षक द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है और ड्यूटी के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
अधिकारियों से शिकायत, जांच के आदेश
मुख्यालय स्तर पर हुई इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एडीजी ने शिकायत पत्र की एक प्रति जबलपुर जोन के आईजी प्रमोद कुमार वर्मा को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की है। आईजी प्रमोद कुमार वर्मा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने शिकायती आवेदन पर आवश्यक टिप्पणी दर्ज कर उसे पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के पास भेजा है। एसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे आरोपों की गहराई से पड़ताल करें और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रेडियो शाखा के कर्मचारियों को जल्द ही बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
गंभीर आरोपों के घेरे में रेडियो अधीक्षक
रेडियो अधीक्षक सुनील राजौरे पर लगे आरोपों की सूची काफी लंबी है,जिसमें चरित्र पर सवाल उठाने से लेकर वित्तीय अनियमितताओं तक का जिक्र है। कर्मचारियों का दावा है कि सामग्री खरीदी की प्रक्रिया में हेराफेरी की गई है और अधीक्षक एक निजी संस्था के माध्यम से लाभ अर्जित कर रहे हैं। महिला कर्मियों ने उन पर गंदी नजर रखने और अमर्यादित भाषा के प्रयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि सुनील राजौरे का स्थानांतरण इंदौर से जबलपुर हुआ था और यहां पदभार ग्रहण करने के महज 10 दिन के भीतर ही उनके व्यवहार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
विभाग में बढ़ता असंतोष और संवादहीनता
रेडियो शाखा के भीतर उपजा यह विवाद अब धीरे-धीरे पूरे पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार पिछले 6 माह से कर्मचारी अधीक्षक की कार्यप्रणाली के कारण असहज महसूस कर रहे थे। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि पुलिस की अन्य शाखाओं में पदस्थ उनके समकक्ष अधिकारी और जूनियर कर्मचारी भी उनके स्वभाव के कारण संवाद करने से बचते हैं। जांच के दायरे में अब वायरलेस सेट, मोबाइल स्टेशन और बैटरी चार्जिंग सिस्टम के रखरखाव से जुड़े तकनीकी पहलू भी शामिल किए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आंतरिक विवाद का असर पुलिस की संचार व्यवस्था पर तो नहीं पड़ रहा है।
