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बिजली कंपनियों की नई खुराफात: नए टैरिफ में जोड़ दिया 9 साल पुराना घाटा, विरोध शुरू



विद्युत नियामक आयोग के आदेश पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर। ​मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर महंगाई की एक नई मार पड़ी है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने बिजली दरों में हुई भारी वृद्धि को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंच के अनुसार बिजली कंपनियों ने चालू वर्ष के लिए बिजली दरें तय करते समय रेगुलेशन 7.2 का सहारा लिया है, लेकिन इसमें नियमों को ताक पर रखकर उपभोक्ताओं के साथ छल किया गया है। दर निर्धारण की प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं को शामिल किया जाना था, जिनमें टैरिफ प्रस्ताव, वर्ष 2024-25 के लिए ट्रू-अप और रेवेन्यू गैप शामिल थे। आरोप है कि इन निर्धारित बिंदुओं के अलावा बिजली कंपनियों ने पिछले 9 वर्षों के सप्लीमेंट्री पावर परचेस खर्च को भी इस बार के बिलों में जोड़ दिया है। इस कदम से बिजली की दरों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो गई है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

-​विद्युत नियामक आयोग ने की पुष्टि

​मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे ने इस विसंगति को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि स्वयं विद्युत नियामक आयोग ने अपने टैरिफ आदेश के पृष्ठ 16 और पैरा 1.25 में इस तथ्य की पुष्टि की है। आयोग के दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में बिजली कंपनियों ने वर्ष 2014-15 से लेकर वर्ष 2022-23 तक के अंतराल का सप्लीमेंट्री पावर परचेस खर्च शामिल किया है। डॉ. नाजपांडे ने इस संबंध में सचिव, विद्युत नियामक आयोग को एक विस्तृत ई-मेल भेजकर विरोध जताया है। उनका तर्क है कि यदि पिछले 9 वर्षों के इन पुराने खर्चों को वर्तमान टैरिफ में नहीं जोड़ा जाता, तो वर्तमान खर्च और आमदनी के बीच का रेवेन्यू गैप पूरी तरह शून्य हो जाता। ऐसी स्थिति में 1 अप्रैल से बिजली की दरें बढ़ाने की कोई आवश्यकता ही नहीं रहती।

-​नियमों को तोड़ने से बढ़ा करोड़ों का रेवेन्यू गैप

​मंच के सदस्यों ने इस पूरी प्रक्रिया को रेगुलेशन 7.2 का दुरुपयोग बताया है। मामले की गहराई से जांच करने पर सामने आया है कि यदि पूर्व के खर्चों को शामिल नहीं किया जाता, तो आयोग द्वारा निर्धारित 2866.24 करोड़ रुपये का रेवेन्यू गैप समाप्त हो जाता। कंपनियों ने आयोग के 16 अक्टूबर 2025 के एक पुराने आदेश का हवाला देकर इन खर्चों को जबरन थोपा है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच का कहना है कि रेगुलेशन में केवल तीन विशिष्ट बिंदुओं पर विचार करने का प्रावधान है, लेकिन चौथा बिंदु जोड़कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाल दिया गया है। आयोग द्वारा दी गई इस मंजूरी को मंच ने तकनीकी और कानूनी रूप से गलत ठहराया है। उनका कहना है कि यह सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं के हितों के साथ खिलवाड़ है।

​बढ़ी दरों को तत्काल वापिस लेने की मांग

​इस मुद्दे पर जबलपुर के कई प्रबुद्ध नागरिकों और अधिवक्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की है। रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, टी.के. रायघटक, डीके सिंह, सुभाष चंद्रा, मनीष शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, पीएस राजपूत और डीआर लखेरा ने संयुक्त रूप से इस वृद्धि की निंदा की है। इन सभी का मानना है कि रेगुलेशन 7.2 को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है ताकि बिजली कंपनियों के पुराने घाटे की भरपाई वर्तमान उपभोक्ताओं से की जा सके। मंच ने मांग की है कि बिजली की बढ़ी हुई दरों को तत्काल वापस लिया जाए और केवल वर्तमान वित्तीय आंकड़ों के आधार पर ही टैरिफ का निर्धारण हो। इस विरोध प्रदर्शन और पत्राचार के बाद अब देखना होगा कि विद्युत नियामक आयोग इस विसंगति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।

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