khabar abhi tak

ट्रांसको की सुपरफास्ट रफ़्तार: 43 हजार किलोमीटर तक फैला पारेषण का करंट,हर तरफ वाहवाही



जबलपुर। मध्य प्रदेश में विद्युत अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण की दिशा में मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने बड़ी सफलता प्राप्त की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने अपनी पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार करते हुए प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को नया आयाम प्रदान किया है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस प्रगति की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले एक साल में राज्य के पारेषण नेटवर्क को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाया गया है।

​ट्रांसफार्मेशन क्षमता में हुई रिकॉर्ड वृद्धि

​मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की कुल स्थापित ट्रांसफार्मेशन क्षमता में इस साल बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 की समाप्ति पर राज्य की कुल क्षमता 81911 एमवीए थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 84293 एमवीए के स्तर पर पहुंच गई है। क्षमता में आया यह उछाल राज्य की निरंतर बढ़ती बिजली की मांग को बिना किसी व्यवधान के पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा। विशेषकर कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस क्षमता विस्तार को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

​नए पावर ट्रांसफार्मर लगे, बढ़ा नेटवर्क

​क्षमता वृद्धि के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एमपी ट्रांसको ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कुल 35 नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए हैं। योजनाबद्ध तरीके से किए गए इस कार्य के तहत 11 विद्युत सबस्टेशनों की मौजूदा क्षमता को बढ़ाया गया, जबकि 21 अन्य सबस्टेशनों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाकर वहां के लोड प्रबंधन को बेहतर किया गया। इन प्रयासों के चलते 31 मार्च 2026 तक विभाग के पास क्रियाशील पावर ट्रांसफार्मरों की कुल संख्या 1046 हो गई है। वर्तमान में पारेषण नेटवर्क में 400 केवी स्तर के 40, 220 केवी स्तर के 218 और 132 केवी स्तर के 788 ट्रांसफार्मर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

​पारेषण लाइनें दूर-दूर तक पहुंची

​विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों के जाल को भी विस्तार दिया गया है। एमपी ट्रांसको ने इस वित्तीय वर्ष में 138 सर्किट किलोमीटर नई एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइनों का निर्माण पूर्ण कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया है। इस नए विस्तार के साथ ही प्रदेश में कुल ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई अब 43128 सर्किट किलोमीटर को पार कर गई है। लाइनों के इस व्यापक नेटवर्क से दूरस्थ क्षेत्रों तक उच्च गुणवत्ता वाली बिजली पहुंचाना अब पहले से अधिक आसान हो गया है। तकनीकी सुधारों के कारण पारेषण के दौरान होने वाले विद्युत नुकसान में भी कमी आने की संभावना है।

​सब-स्टेशनों की संख्या और दक्षता में सुधार

​प्रदेश की पारेषण व्यवस्था वर्तमान में 417 सबस्टेशनों के एक सुव्यवस्थित ढांचे पर टिकी हुई है। इनमें अति उच्च दाब के 400 केवी वाले 14 सबस्टेशन, 220 केवी वाले 88 सबस्टेशन और 132 केवी वाले 315 सबस्टेशन शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस पूरी उपलब्धि का श्रेय एमपी ट्रांसको के इंजीनियरों और मैदानी कर्मचारियों की कार्यकुशलता को दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और प्रतिबद्धता के कारण ही निर्धारित समय सीमा में इन परियोजनाओं को पूरा करना संभव हो पाया है। विभाग का लक्ष्य भविष्य में अत्याधुनिक तकनीक का समावेश कर प्रदेश की विद्युत पारेषण प्रणाली को देश की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में शामिल करना है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak