ग्वालियर। एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने एक हैबियस कार्पस याचिका में 19 वर्षीय युवती की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए उसे अपने प्रेमी अनुज के साथ रहने की अनुमति दे दी। साथ ही उसकी सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए अगले छह माह तक दो महिला पुलिसकर्मियों को शौर्या दीदी नियुक्त किया है।
यह याचिका अवधेश की ओर से अधिवक्ता सुरेश पाल सिंह गुर्जर ने दायर की थी। आरोप था कि उसकी पत्नी को अनुज ने अवैध रूप से अपने पास रखा है। मामले में युवती को वन स्टॉप सेंटर से सब इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह सिकरवार, हेड कांस्टेबल अखिलेश सेंथिया और लेडी कांस्टेबल भावना द्वारा कोर्ट में पेश किया गया। युवती के माता-पिता, पति अवधेश और प्रेमी अनुज भी कोर्ट में मौजूद रहे।
युवती बोली कि वह अवैध बंधन में नहीं है
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने युवती से उसकी इच्छा पूछी। युवती ने साफ कहा कि वह बालिग है, किसी अवैध बंधन में नहीं है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने पति और अपने माता-पिता दोनों के साथ रहने से इनकार कर दिया। युवती ने बताया कि पति की उम्र करीब 40 वर्ष है, जबकि उसकी उम्र 19 साल है, 21 वर्ष का अंतर होने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाया और उसके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। कोर्ट के कहने पर शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी ने युवती की काउंसलिंग की।
काउंसलिंग के बाद भी युवती ने प्रेमी अनुज के साथ रहने की इच्छा दोहराई। अनुज ने भी कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह युवती की पूरी देखभाल करेगा और किसी तरह की प्रताडऩा नहीं देगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका का उद्देश्य समाप्त हो चुका है। कोर्ट ने युवती को अनुज के साथ जाने की अनुमति देते हुए अंजलि ज्ञानानी और लेडी कांस्टेबल भावना को अगले छह महीने के लिए शौर्या दीदी नियुक्त किया, जो युवती के संपर्क में रहकर उसकी सुरक्षा, भलाई और मार्गदर्शन सुनिश्चित करेंगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि युवती को वन स्टाप सेंटर कंपू ग्वालियर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मुक्त किया जाए। इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
