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कैशलेस ट्रांजैक्शन से रेलवे को 13 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व मिला, 16 लाख यात्रियों ने किया उपयोग

 

जबलपुर। रेल यात्रा करने वाले यात्री अब तेजी से डिजिटल ट्रांजैक्शन कर रहे है, भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को डिजिटल तकनीकों के माध्यम से सुविधाजनक, सुरक्षित एवं पारदर्शी सेवाएं के उद्देश्य से कैशलेस ट्रांजैक्शन को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में पश्चिम मध्य रेल भी सक्रिय रूप से प्रयासरत है, और विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।

                                   पश्चिम मध्य रेल के जबलपुर, भोपाल एवं कोटा मंडल में पीआरएस व यूटीएस काउंटर्स पर यूपीआई/ भीम, मोबाइल टिकटिंग और पीओएस मशीनों के माध्यम से कैशलेस भुगतान में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों को ट्रेनों एवं स्टेशन परिसरों में डिजिटल माध्यमों से टिकट खरीदने और भुगतान करने हेतु भी प्रेरित किया जा रहा है। वित्तीय साल 2025-26 के मार्च माह में पश्चिम मध्य रेल ने पीआरएस और यूटीएस के माध्यम से कुल 16,01,999 यात्रियों से 13,20,61,896 का कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रेलवे राजस्व अर्जित किया। वही पीआरएस के अंतर्गत पीओएस मशीनों से 12,92,560 तथा यूपीआई/भीम ऐप से 5,39,47,501 का राजस्व प्राप्त हुआ। यूटीएस प्रणाली में मोबाइल टिकटिंग से 1,52,44,610 एवं यूपीआई/भीम ऐप से 6,15,77,225 का राजस्व अर्जित किया गया। डिजिटल भुगतान प्रणाली से यात्रियों को नकद धन राशि ले जाने की आवश्यकता समाप्त होती है, जिससे समय की बचत के साथ-साथ लेन-देन में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होती है। रेलवे द्वारा अपनाए गए सभी डिजिटल भुगतान माध्यम उन्नत एन्क्रिप्शन एवं डेटा प्रमाणीकरण तकनीकों से सुरक्षित बनाए गए हैं। पश्चिम मध्य रेल अपने तीनों मंडलों में डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सशक्त एवं सुलभ बनाने हेतु निरंतर प्रयास कर रही है। भविष्य में अधिक से अधिक यात्रियों को कैशलेस ट्रांजैक्शन से जोडऩे के लिए जागरूकता अभियान एवं तकनीकी विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


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