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शराब दुकानों के आवंटन में 'पावर गेम': तीन समूहों पर करोड़ों की मुहर, अब अगले बड़े उलटफेर का इंतजार!

 


अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखा गया है ताकि अधिक से अधिक बोलीदाता इसमें भाग ले सकें

जबलपुर। जिले में शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आबकारी विभाग द्वारा संचालित इस नीलामी प्रक्रिया के दूसरे चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिसने सरकारी राजस्व में भारी वृद्धि के संकेत दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में हुई इस कार्रवाई में जिले के तीन प्रमुख समूहों की दुकानों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं, जिनमें बाजार के बड़े ठेकेदारों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई। इस चरण में कुल 12 दुकानों का आवंटन किया गया है, जिसके माध्यम से विभाग को 55 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। विभागीय सूचना के अनुसार, अगले दौर की नीलामी प्रक्रिया 7 मार्च को आयोजित की जाएगी। इसमें जिले की शेष बची हुई दुकानों के लिए निविदाएं बुलाई जाएंगी।

​अब तक की नीलामी में क्या हुआ

​दूसरे चरण की इस प्रक्रिया में कुंडम, शाहपुरा और गुरंदी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया था। विभाग ने इन क्षेत्रों को अलग-अलग समूहों में विभाजित कर टेंडर प्रक्रिया आयोजित की थी। कुंडम समूह के अंतर्गत आने वाली चार दुकानों के लिए गणेश एसोसिएट्स ने सबसे ऊंची बोली लगाकर सफलता हासिल की। वहीं, शाहपुरा समूह की पांच दुकानों का जिम्मा देवरी लिकर्स के पास गया है। गुरंदी समूह की तीन दुकानों के लिए नरेंद्र रजक की निविदा को अंतिम रूप से स्वीकार किया गया। इन सभी समूहों में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शराब व्यवसाय को लेकर बाजार में निवेश की संभावनाएं काफी प्रबल बनी हुई हैं।

​जिले में कुल 143 शराब दुकानें

​जबलपुर जिले में आबकारी विभाग ने कुल 143 शराब दुकानों को चिन्हित किया है। इन दुकानों का आवंटन व्यवस्थित तरीके से विभिन्न चरणों में समूह बनाकर किया जा रहा है। दूसरे चरण की सफलता से पहले विभाग ने प्रथम चरण में भी उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए थे, जिसमें बिलहरी, गुप्तेश्वर और बरगी क्षेत्र की 11 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखा गया है ताकि अधिक से अधिक बोलीदाता इसमें भाग ले सकें। 55 करोड़ रुपये की सफल बोली जिले के राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


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