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फ्लाई ऐश प्रबंधन में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी का दबदबा, मिले चार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार



 100% से अधिक फ्लाई ऐश उपयोगिता का नया मानक; एमपी के तीन ताप विद्युत गृहों ने जीते 4 नेशनल अवार्ड

जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने बिजली उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के तीन प्रमुख केंद्रों सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया और अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई को फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक व सुनियोजित उपयोग के लिए चार प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है। यह सम्मान गोवा में आयोजित 15वें फ्लाई ऐश उपयोगिता पुरस्कार 2026 समारोह में प्रदान किए गए। मिशन एनर्जी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय समारोह में ऊर्जा और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता दी गई है।

​विशिष्ट श्रेणियों में मिली बड़ी सफलता

​पुरस्कार समारोह में सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी को राज्य क्षेत्र की 500 से 1500 मेगावाट श्रेणी में फ्लाई ऐश के असाधारण उपयोग के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं अमरकंटक ताप विद्युत गृह को 500 मेगावाट से कम की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान मिला। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने इस वर्ष विशेष छाप छोड़ी और दो सर्वोच्च पुरस्कार अपने नाम किए। इनमें फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट उपयोग के साथ-साथ ओवरऑल चैंपियन फ्लाई ऐश मैनेजमेंट एक्सीलेंस का प्रतिष्ठित खिताब शामिल है। ये पुरस्कार कंपनी द्वारा राख के निपटान के लिए अपनाई गई उन्नत कार्यप्रणाली को प्रमाणित करते हैं।

​एक करोड़ मीट्रिक टन से अधिक राख का निस्तारण

​कंपनी के विभिन्न केंद्रों ने फ्लाई ऐश उपयोगिता के मामले में निर्धारित लक्ष्यों से कहीं अधिक प्रदर्शन किया है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 161 प्रतिशत की उपयोगिता दर दर्ज करते हुए 61 लाख मीट्रिक टन से अधिक राख का सफलतापूर्वक निस्तारण किया। इसी तरह अमरकंटक ताप विद्युत गृह ने 204 प्रतिशत की रिकॉर्ड दर से 6.6 लाख मीट्रिक टन राख का प्रबंधन किया। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह ने भी 119 प्रतिशत की संचयी उपयोगिता दर हासिल कर 34 लाख मीट्रिक टन से अधिक राख का निष्पादन किया। कुल मिलाकर इन तीन केंद्रों द्वारा एक करोड़ दो लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई ऐश का निपटान किया गया, जो न केवल वर्तमान उत्सर्जन बल्कि पुरानी संचित राख के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी दर्शाता है।

​तकनीकी दक्षता और टीम वर्क का कमाल

​प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस सफलता को पूरी टीम की तकनीकी दक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति समर्पण का प्रतिफल बताया है। उन्होंने कहा कि ताप विद्युत गृहों में 100 प्रतिशत से अधिक की दर से फ्लाई ऐश उपयोगिता प्राप्त करना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम ने तकनीकी टीमों की सराहना करते हुए बताया कि कंपनी द्वारा अपनाई गई प्रगतिशील तकनीक और कुशल प्रबंधन ने पावर जनरेटिंग कंपनी को इस क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। कंपनी भविष्य में भी पर्यावरण सुरक्षा और शून्य अपशिष्ट के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपने परिचालन को जारी रखने के लिए संकल्पित है।

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