जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय में विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई को आगे बढ़ा दिया गया है। न्यायालय ने इन मामलों में अगली सुनवाई के लिए अप्रैल माह के शुरुआती सप्ताह की तारीखें निर्धारित की हैं। इसमें एक मामला न्यायमूर्ति से संपर्क करने के प्रयास से जुड़ा है, जबकि दूसरा प्रकरण गैंगस्टर अब्दुल रज्जाक द्वारा की गई शिकायतों से संबंधित है।
न्यायमूर्ति से संपर्क के प्रयास मामला
कटनी जिले के विजयराघवगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से विधायक संजय पाठक द्वारा न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश का मामला पिछले वर्ष चर्चा में आया था। 1 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने स्वयं खुली अदालत में इस बात का खुलासा किया था कि विधायक ने उनसे संपर्क साधने का प्रयास किया है। इस घटनाक्रम के बाद न्यायमूर्ति ने संबंधित मामले को अपनी बेंच से हटाने के निर्देश जारी कर दिए थे। विधायक के इस कृत्य पर अब तक कोई ठोस अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होने के कारण आशुतोष दीक्षित द्वारा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
डिवीजन बेंच में पेश की आपत्तियां
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष गुरुवार को इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती ने पक्ष रखा। वहीं विधायक संजय पाठक की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान विधायक के पक्ष ने याचिका में लगाए गए तथ्यों पर अपनी लिखित आपत्तियां प्रस्तुत कीं। इन आपत्तियों के अवलोकन और विस्तृत बहस की आवश्यकता को देखते हुए न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तिथि तय की है।
क्या है अब्दुल रज्जाक की याचिका
विधायक संजय पाठक से जुड़ा दूसरा मामला जबलपुर के हिस्ट्रीशीटर अब्दुल रज्जाक की याचिका का है। रज्जाक ने न्यायालय में दावा किया है कि विधायक के राजनीतिक प्रभाव और इशारे पर ही जिला प्रशासन ने उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाइयां की हैं। इस याचिका पर जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की बेंच में सुनवाई होनी थी, जिसे अब 1 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। वर्तमान में दोनों पक्षों के वकील अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य जुटा रहे हैं और आगामी तिथि पर इस पर बहस जारी रहेगी।
