khabar abhi tak

तारीखों के चक्रव्यूह में फंसी पुलिस या रसूख के आगे बेबस जांच, रोहित खटवानी मामले में उठते बड़े सवाल।



जबलपुर
। जबलपुर में फर्जी बीमा रजिस्ट्रेशन के बड़े घोटाले में मुख्य आरोपी रोहित खटवानी की गिरफ्तारी को लेकर स्थिति काफी उलझती नजर आ रही है। इस पूरे प्रकरण में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू की टीम ने अपनी विस्तृत जांच पूरी कर ली है। जांच के दौरान जुटाए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर रोहित खतवानी को इस जालसाजी का मुख्य दोषी माना गया है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन द्वारा अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। यह मामला वर्तमान में शहर के प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि जांच में दोष सिद्ध होने के बाद भी आरोपी की स्वतंत्र आवाजाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में धोखाधड़ी की परतों को खोलने के लिए विभाग ने लंबी प्रक्रिया अपनाई है।

​जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुई भूमिका,आगे क्या हुआ

​ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया गया है कि किस प्रकार कागजों में हेरफेर कर फर्जी बीमा पॉलिसी और रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए थे। रोहित खतवानी पर आरोप है कि उन्होंने नियम विरुद्ध जाकर अनुचित वित्तीय लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया। विभाग ने सैकड़ों दस्तावेजों की बारीकी से जांच की है जिसमें कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। इन दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही जांच एजेंसी ने आरोपी को स्पष्ट रूप से दोषी करार दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में 11215445 जैसे लिंक और अन्य तकनीकी तथ्यों को आधार बनाया गया है जिससे यह साबित होता है कि घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। जांच दल ने हर उस बिंदु को खंगाला है जो इस फर्जीवाड़े की जड़ तक जाता है।

​अदालती प्रक्रिया से क्या नतीजा निकला

​कानूनी मोर्चे पर रोहित खतवानी को अब तक कोई बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। जिला अदालत ने मामले की गंभीरता और ईओडब्ल्यू द्वारा प्रस्तुत किए गए ठोस तथ्यों को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका को पहले ही सिरे से खारिज कर दिया है। इसके बाद यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की शरण में पहुंचा है। हाई कोर्ट में आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत याचिका पर लगातार सुनवाई का दौर जारी है। कोर्ट में बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच कानूनी दलीलों और तारीखों का खेल चल रहा है जिससे फिलहाल गिरफ्तारी की प्रक्रिया अटकी हुई है। अभियोजन पक्ष की लगातार यह दलील रही है कि आरोपी का जेल से बाहर रहना जांच को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रहती है।

​पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

​प्रशासनिक स्तर पर इस हाई प्रोफाइल मामले में हो रही देरी ने कई सामाजिक और कानूनी आशंकाओं को जन्म दिया है। जब जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से रोहित खतवानी को दोषी मान लिया है और निचली अदालत से भी आरोपी को कोई राहत नहीं मिली है तो गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस विलंब के कारण आम जनता के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में ढिलाई बरती जा रही है। अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के आगामी फैसले और ईओडब्ल्यू की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं जिससे इस बड़े धोखाधड़ी मामले की अंतिम परिणति तय होगी। विभाग अब कोर्ट के आदेशों के अनुसार अपनी अगली रणनीति तैयार करने में जुटा है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak