जबलपुर। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में जबलपुर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अपोलो हॉस्पिटल्स जबलपुर में राज्य की पहली सफल रोबोटिक प्रोस्टेट सर्जरी को अंजाम दिया गया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद अब मध्य प्रदेश के प्रोस्टेट कैंसर पीड़ितों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या बड़े महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। यूरोलॉजिस्ट और रोबोटिक यूरो सर्जन डॉ. प्रणल सहारे के नेतृत्व में हुई इस ऐतिहासिक सर्जरी ने प्रदेश को देश के उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है जहां रोबोटिक तकनीक से कैंसर का सटीक उपचार संभव है। इस उपलब्धि के संदर्भ में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान रोबोटिक यूरोसर्जन डॉ. प्रणल सहारे और वरिष्ठ सर्जन डॉ. गणेश गोस्वामी के साथ अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. शोभित बड़ेरिया, सीईओ डॉ. पुनीत मेहता एवं बिजनेस हेड निलेश रावल भी मौजूद रहे।
चिकित्सा सेवाओं में आत्मनिर्भर होता मध्य प्रदेश
अपोलो हॉस्पिटल्स जबलपुर स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार की सुविधा उनके अपने ही प्रदेश में मिलना शुरू हो गई है। अस्पताल प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य मरीजों को इलाज के लिए बाहरी राज्यों में जाने की विवशता से मुक्ति दिलाना है। संस्थान में रोबोटिक प्रणाली के साथ एंडोयूरोलॉजी, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य जटिल यूरोलॉजिकल उपचारों की भी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। यह पहल प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती प्रदान करेगी जिससे हजारों रोगियों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।
पारंपरिक तकनीक के मुकाबले रोबोटिक सर्जरी
रोबोटिक प्रोस्टेट सर्जरी आधुनिक चिकित्सा की एक न्यूनतम चीरा-फाड़ वाली उन्नत पद्धति है। इसमें पारंपरिक सर्जरी की तुलना में शरीर पर बहुत छोटे निशान आते हैं। जहां पुरानी पद्धति में 15 से 20 सेंटीमीटर का बड़ा चीरा लगाना पड़ता था, वहीं रोबोटिक तकनीक में मात्र 1 से 2 सेंटीमीटर के छोटे छिद्रों के माध्यम से पूरा ऑपरेशन संपन्न हो जाता है। छोटे कट होने के कारण सर्जरी के दौरान शरीर से खून का बहाव न्यूनतम होता है और संक्रमण की आशंका भी समाप्त हो जाती है। तकनीकी रूप से यह प्रक्रिया बेहद सटीक है जिससे सर्जन को आंतरिक अंगों का स्पष्ट दृश्य मिलता है और जटिल ऑपरेशन भी सुगमता से पूरे होते हैं।
रिकवरी के समय में कमी का दावा
मरीजों के लिए रोबोटिक तकनीक के लाभ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सामान्य सर्जरी कराने पर मरीज को 8 से 10 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था, लेकिन इस आधुनिक विधि में मरीज को केवल 3 से 5 दिन में ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने या रिकवरी का समय भी 6 से 8 सप्ताह के बजाय घटकर केवल 2 से 3 सप्ताह रह गया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें प्रोस्टेट के पास की नसों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे सर्जरी के बाद मरीज की यौन क्रिया और पेशाब पर नियंत्रण की क्षमता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता और वह सामान्य जीवन जी सकता है।
अनुभवी सर्जन्स और प्रबंधन टीम का योगदान
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे डॉ. प्रणल सहारे का 10 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव रहा है। उन्होंने अहमदाबाद के बी.जे. मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से प्रशिक्षण लेकर किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट रोगों के उपचार में विशेषज्ञता हासिल की है। उनके साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सर्जन डॉ. गणेश गोस्वामी का मार्गदर्शन भी उपलब्ध रहा, जिनके पास यूके और यूरोप में काम करने का दो दशकों का लंबा अनुभव है।
