
जबलपुर। रेलवे बोर्ड ने आगामी मानसून के दौरान मानसून के दस्तक देने से करीब तीन माह पूर्व ही रेल पटरियों और पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे सहित सभी रेल जोनों को हाई अलर्ट जारी किया है। इस बार बाढ़ और भारी बारिश के दौरान रेल पुलों की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी।
तैयारियों की रिपोर्ट व संसाधन बताने होंगे
आमतौर पर मानसून की तैयारियां मई के अंत तक की जाती हैं, लेकिन इस बार रेलवे बोर्ड ने मार्च के अंतिम सप्ताह में ही सभी जोनल रेलवे के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियरों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एक अप्रैल 2026 तक सभी जोनल रेलवे को अपनी तैयारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध संसाधनों का पूरा ब्योरा सौंपना होगा।
आपदा से पूर्व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
रेलवे बोर्ड ने निर्देश जारी किया है कि किस पुल की निगरानी ड्रोन करेंगे, कितने ड्रोन उपलब्ध हैं, इसकी भी सूचना देनी होगी। इस प्री-मानसून अलर्ट का मकसद किसी भी संभावित आपदा से पहले सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता इंतजाम करना है।
बोर्ड निदेशक ने ये पत्र जारी किया
रेलवे बोर्ड के निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग) अभिमन्यु लांबा द्वारा जारी 24 मार्च को जारी पत्र के अनुसार, इस वर्ष संवेदनशील रेल पुलों की निगरानी के लिए ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। दुर्गम इलाकों और ऊफान पर रहने वाली नदियों के ऊपर बने पुलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन तकनीक को प्राथमिकता दी गई है।
बोल्डर, रेत बोरियां व मिट्टी का भारी स्टाक होगा
इससे बाढ़ के दौरान बिना किसी मानवीय जोखिम के पुलों की संरचना और जलस्तर का सटीक आकलन किया जा सकेगा। बारिश से ट्रैक धंसने की स्थिति में मरम्मत के लिए चिह्नित स्टेशनों पर बोल्डर (पत्थर), रेत की बोरियां और मिट्टी का भारी स्टाक अभी से जमा किया जाएगा।
रेलवे को लगातार अलर्ट भी मिलता रहेगा
नदी के जलस्तर को मापने के लिए वाटर लेवल मानिटरिंग सिस्टम को सीधे ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) से जोड़ा गया है, जिससे रेलवे को लगातार अलर्ट भी मिलता रहेगा। रेल अधिकारी स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के साथ 24 घंटे संपर्क में रहेंगे ताकि बांधों से पानी छोड़े जाने की सूचना समय पर मिल सके।