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थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट के संचालन में पारंगत हुए जेनको के अभियंता

 


जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के नवनियुक्त सहायक अभियंताओं ने सुपर क्रिटिकल सिम्युलेटर प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी तकनीकी कार्यक्षमता में वृद्धि की है। हाल ही में कंपनी के दूसरे बैच के 11 प्रशिक्षु सहायक अभियंताओं ने राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान यानी एनपीटीआई नागपुर में आयोजित छह सप्ताह का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस सत्र के दौरान अभियंताओं को ताप और जल विद्युत गृहों के परिचालन और संधारण की आधुनिक कार्यप्रणालियों से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण के एक महत्वपूर्ण चरण में इन अधिकारियों ने महाराष्ट्र के चंद्रपुर और कोराडी स्थित 600-600 मेगावाट की सुपर क्रिटिकल इकाइयों का प्रत्यक्ष भ्रमण किया और वहां की जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

​केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के मानकों पर आधारित रहा विशेष पाठ्यक्रम

​प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन एनपीटीआई के निदेशक एसपी धर्माधिकारी की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने बताया कि पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह और डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम के दिशा-निर्देशों पर यह पाठ्यक्रम केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तैयार किया गया था। इस दौरान प्रशिक्षुओं को विद्युत उत्पादन की नवीनतम तकनीकों के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट की संचालन बारीकियों को शामिल किया गया था ताकि भविष्य में संयंत्रों के प्रबंधन के दौरान बेहतर दक्षता सुनिश्चित की जा सके।

​कार्यक्षमता संवर्धन और कार्पोरेट एथिक्स पर रहा मुख्य जोर

​मानव संसाधन एवं प्रशासन के कार्यपालक निदेशक दीपक कश्यप ने एनपीटीआई के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस समग्र प्रशिक्षण से युवा अभियंताओं की तकनीकी नींव मजबूत हुई है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की ओर से अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रशिक्षण डॉ. अशोक तिवारी ने समापन समारोह में सभी प्रशिक्षुओं को थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट की बेस्ट प्रैक्टिस के बारे में बताया। उन्होंने दक्षता संवर्धन और कार्पोरेट एथिक्स के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले अधिकारियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन संस्थान के सहायक निदेशक शशांक शुक्ला द्वारा किया गया।

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