2018 से चल रहे इस खेल में न जाने कितने आम लोगों की गाढ़ी कमाई दांव पर लग गई
जबलपुर। जबलपुर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने शासन को लाखों रुपये की राजस्व क्षति पहुँचाने के मामले में एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले एक रसूखदार कॉलोनाइजर के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराधिक मामला दर्ज किया गया है। विभाग को लंबे समय से इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हो रही थीं जिसकी जांच के बाद यह कदम उठाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम भड़पुरा में बिना किसी वैधानिक अनुमति के रघुकुल वैली नाम से एक अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी। इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया और शासन को देय अनिवार्य शुल्कों की चोरी की गई। इस अवैध निर्माण और शासन की अनुमति की अनदेखी के चलते राज्य सरकार को लगभग 98 लाख रुपये की बड़ी आर्थिक हानि हुई है। इस गंभीर मामले में आरोपी अकुल पाण्डेय के विरुद्ध धारा 420 भारतीय दंड विधान के तहत अपराध दर्ज किया गया है। आरोपी अकुल पाण्डेय के पिता का नाम अम्बरिष कुमार पाण्डेय है और वह 11 एसबीआई कॉलोनी आनंदकुंज गढ़ा जबलपुर का निवासी है। उसे रघुकुल वैली कॉलोनी का मुख्य बिल्डर बताया गया है जिसने बिना किसी डर के इस अवैध प्रोजेक्ट को अंजाम दिया।
कृषि भूमि पर रघुकुल वैली का अवैध निर्माण
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की प्रारंभिक जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी द्वारा ग्राम भड़पुरा के खसरा नंबर 103, 104, 105/1 और 105/2 की भूमि पर रघुकुल वैली नामक कॉलोनी विकसित की जा रही थी। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग यानी टीएनसीपी जबलपुर के आधिकारिक अभिलेखों और मास्टर प्लान के नियमों के अनुसार यह संपूर्ण भूमि भेड़ाघाट विकास योजना-2021 के अंतर्गत केवल कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। नियमों के अनुसार ऐसी कृषि भूमि पर किसी भी प्रकार की आवासीय कॉलोनी के निर्माण की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती है। इसके बावजूद आरोपी ने शासन के कड़े नियमों की परवाह न करते हुए बिना किसी विकास अनुज्ञा और बिना किसी सक्षम अधिकारी से स्वीकृत ले-आउट के ही कॉलोनी का निर्माण कार्य बड़े स्तर पर शुरू कर दिया। इस अवैध प्रक्रिया में भूमि का डायवर्सन भी नहीं कराया गया था जो कि किसी भी वैध आवासीय परियोजना के लिए प्राथमिक और अनिवार्य शर्त होती है। आरोपी ने कृषि भूमि का स्वरूप बदले बिना ही वहां निर्माण गतिविधियां संचालित कर दीं।
शासन को लगभग 98 लाख रुपये की राजस्व क्षति
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की सूक्ष्म जांच में यह भी पूरी तरह उजागर हुआ है कि आरोपी ने कॉलोनी विकास से संबंधित किसी भी अनिवार्य और वैधानिक शुल्क का भुगतान सरकारी खजाने में नहीं किया था। इस भारी लापरवाही और सुनियोजित धोखाधड़ी से शासन को कुल मिलाकर लगभग 98 लाख रुपये की भारी राजस्व क्षति हुई है। इस वित्तीय हानि का विस्तृत ब्यौरा ईओडब्ल्यू द्वारा तैयार किया गया है जिसमें बताया गया है कि इसमें अनुज्ञा शुल्क के रूप में लगभग 11 लाख रुपये की चपत सरकार को लगी है। इसके अलावा एक बहुत बड़ी राशि आश्रय शुल्क यानी शेल्टर फी के रूप में रोकी गई है जो कि लगभग 78 लाख रुपये के करीब बैठती है। साथ ही पर्यवेक्षण एवं कर्मकार शुल्क के तौर पर भी शासन को लगभग 9 लाख रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है। इन सभी अनिवार्य शुल्कों की चोरी करके आरोपी ने अपने निजी लाभ के लिए संपूर्ण सरकारी तंत्र को धोखा दिया और जनता की सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले धन को सरकार तक नहीं पहुंचने दिया।
2018 से संचालित था अवैध भूखंडों का कारोबार
ईओडब्ल्यू द्वारा की गई विस्तृत जांच और जुटाए गए दस्तावेजों से यह बात भी स्पष्ट हुई है कि यह अवैध कारोबार कोई नया नहीं था बल्कि आरोपी वर्ष 2018 से लेकर 2023 के बीच लगातार इस गैर-कानूनी गतिविधि में संलिप्त रहा। इस 5 वर्ष की लंबी अवधि के दौरान उसने बिना किसी वैधानिक डायवर्सन, बिना किसी अनुमोदित ले-आउट और बिना किसी आवश्यक सरकारी पंजीकरण के ही कृषि भूमि को बहुत छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर दिया था। इन छोटे भूखंडों को उसने अवैध रूप से विज्ञापन और लुभावने वादों के माध्यम से आम नागरिकों को बेच दिया। इस कृत्य से न केवल शासन के राजस्व को करोड़ों का नुकसान हुआ बल्कि उन सीधे-सादे नागरिकों के साथ भी बहुत बड़ी धोखाधड़ी की गई है जिन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई इन अवैध भूखंडों को खरीदने में लगा दी। ऐसे अवैध भूखंडों पर भविष्य में किसी भी प्रकार का बैंक ऋण मिलना या वैध निर्माण की अनुमति प्राप्त करना खरीदारों के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी समस्या बन सकता है।
420 के तहत मामला दर्ज कर शुरू की विवेचना
फिलहाल आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर की इकाई ने आरोपी अकुल पाण्डेय के खिलाफ धोखाधड़ी से जुड़ी धारा 420 के तहत मामला विधिवत दर्ज कर लिया है और प्रकरण की अत्यंत गहन विवेचना शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू की विशेष टीम अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस विशाल अवैध कॉलोनी के निर्माण और इसकी बिक्री में कुछ अन्य लोग, बिचौलिए या संबंधित विभागों के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी पर्दे के पीछे से शामिल थे। आरोपी को रघुकुल वैली कॉलोनी का कर्ता-धर्ता माना गया है और उसके द्वारा अब तक किए गए सभी भूखंडों के सौदों और उनके दस्तावेजों की जानकारी भी बड़े पैमाने पर जुटाई जा रही है। ईओडब्ल्यू की इस बड़ी कार्रवाई से जबलपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय अन्य अवैध कॉलोनाइजरों के बीच भी भारी हड़कंप मचा हुआ है।
