जबलपुर । शहर में लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामले में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच एजेंसी ने इस प्रकरण में शहर के पूर्व महापौर प्रभात साहू सहित कुल 5 प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। यह कार्रवाई उस अज्ञात प्राथमिकी के संदर्भ में की गई है, जिसमें आरोपियों की पहचान गुप्त रहने के कारण कानूनी प्रक्रिया रुकी हुई थी। एसटीएफ की इस सक्रियता के बाद अब मामले में न्यायिक सुनवाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
अज्ञात पर एफआईआर को मिला नाम
इस प्रकरण की शुरुआत एक अज्ञात एफआईआर के माध्यम से हुई थी, जिसमें लंबे समय तक किसी का नाम स्पष्ट नहीं हो सका था। एसटीएफ की टीम ने साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं और पाया कि इसमें शहर के रसूखदार लोगों की संलिप्तता है। जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के बाद पुलिस ने प्रभात साहू और उनके साथ 4 अन्य सहयोगियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कानून के समक्ष सभी पक्ष समान हैं और इसी सिद्धांत के तहत साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट तैयार की गई है।
राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल
जबलपुर की राजनीति में पूर्व महापौर प्रभात साहू का नाम प्रमुखता से लिया जाता रहा है, ऐसे में एसटीएफ द्वारा न्यायालय में चालान पेश किए जाने से प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुल 5 नामजद आरोपियों पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसटीएफ का मानना है कि इस कदम से 'अज्ञात' के नाम पर कानून से बचने का खेल अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। आने वाले दिनों में कोर्ट इस मामले के तथ्यों पर विचार करेगी, जिससे घटना से जुड़े अन्य पहलुओं के उजागर होने की संभावना है।
क्या है मामला
18 सितंबर 2025 को हेलमेट चेकिंग के दौरान शुरू हुआ एक मामूली विवाद अब 'सत्ता बनाम कानून' की बड़ी लड़ाई में तब्दील हो गया है आरोप है कि बिना हेलमेट वाहन चलाने पर रोके जाने के बाद, पूर्व महापौर ने न केवल पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, बल्कि फोन करके अपने समर्थकों को भी मौके पर बुला लिया।भीड़ इकट्ठा होने के बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई, जिसे कानून व्यवस्था पर सीधा हमला माना जा रहा है। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ न केवल गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई, बल्कि मारपीट की नौबत भी आ गई। इस घटना ने प्रशासन और राजनीतिक रसूख के बीच के टकराव को उजागर कर दिया है। फिलहाल, पुलिस की शुरुआती भूमिका और उसके बाद की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
