जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक युवक की मौत के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने पूछा है कि आखिर बिना पोस्टमार्टम किए शव को दफनाने की अनुमति कैसे दी गई। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने शनिवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए शासन को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। याचिकाकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी ने अपने भाई गयासुद्दीन की मौत को संदिग्ध बताते हुए कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। घटना के अनुसार गयासुद्दीन मार्च 2025 में नरसिंहपुर में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी।
कब्र से शव निकालने की मांग
याचिका में उल्लेख किया गया है कि अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे जिससे यह सामान्य मौत नहीं लगती। परिजनों ने पूर्व में पुलिस प्रशासन से जांच की गुहार लगाई थी लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा जहां पहले एकल पीठ ने याचिका निरस्त कर दी थी। अब खंडपीठ ने इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार का पक्ष जानने की आवश्यकता जताई है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि मामले की निष्पक्ष जांच और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव का चिकित्सीय परीक्षण जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना सरकारी पक्ष सुने याचिका का निराकरण सही नहीं था इसलिए अब विस्तृत जवाब मांगा गया है।
