
नई दिल्ली. चंद्र ग्रहण 3 मार्च मंगलवार को शाम छह बजे से लगा और 6.48 बजे तक दिखा। यह ग्रहण महाभारत कालीन है, क्योंकि इस दिन अग्नि पंचक योग पर लगा। महाभारत काल के समय भी फाल्गुन माह में ग्रहण दो बार लगा था। यही नहीं 19 साल बाद होली के एक दिन पहले ग्रहण लगा है। पिछले माह ही फाल्गुन माह कृष्णपक्ष अमावस्या यानी 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगा था।
यह ग्रहण भारत में शाम छह बजे से 6:48 बजे तक रहा। नौ घंटे पहले सूतक काल लगने से शहर के सभी मंदिरों के पट बंद हो गए। ज्योतिषविदों का मानना है कि द्वापर युग के अंत में महाभारत का युद्ध हुआ था, तब इसी तरह का ग्रहण लगा था। तभी फाल्गुन मास की पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण और इस मास के कृष्णपक्ष अमावस्या तिथि को सूर्य ग्रहण लगा था। पिछले माह 17 फरवरी को अमावस्या तिथि को ही सूर्य ग्रहण लगा था। हालांकि भारत में दृश्यमान नहीं था।
ग्रहण के बाद स्नान और दान का महत्व
चंद्र ग्रहण समाप्ति के पश्चात शास्त्रों में ग्रहण को अशुभ और नकारात्मकता ऊर्जा माना जाता है। ग्रहण के मोक्ष काल के बाद जप, तप, स्नान और दान का महत्व विशेष होता है।
ग्रहण के बाद करें ये काम
- गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ
- चावल का दान से चंद्र दोष से मुक्त मिलती है।
- ग्रहण के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- भगवान की मूर्ति को गंगाजल से स्नान करवाएं।