जबलपुर से पुर्तगाल तक मनी ट्रेल का खुलासा,भोपाल ईडी ने राजुल ग्रुप के तीन ठिकानों पर दी दबिश
जबलपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने 19 मार्च को जबलपुर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स राजुल ग्रुप और उसके पार्टनर प्रियांक मेहता के तीन ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। यह पूरी कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 के तहत की गई है। जांच का मुख्य आधार भारत से बाहर अचल संपत्तियों की खरीद के लिए लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। ईडी की यह जांच आयकर विभाग द्वारा साझा की गई गोपनीय जानकारी पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2023 में जब आयकर विभाग ने राजुल ग्रुप के यहां तलाशी ली थी तब प्रियांक मेहता के पास विदेशी संपत्तियां होने के पुख्ता प्रमाण मिले थे। इसी कड़ी को जोड़ते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने अब अपनी कार्रवाई को विस्तार दिया है और मनी ट्रेल की सघन जांच शुरू की है। जांच अधिकारियों ने मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी एकत्र किए हैं जो इस पूरे संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि करते हैं।
लिस्बन में संपत्ति निवेश और आय छिपाने के मामले का खुलासा
जांच के दौरान यह गंभीर तथ्य सामने आया कि प्रियांक मेहता ने पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में एक शानदार रिहायशी फ्लैट खरीदा है। इस संपत्ति की खरीद के लिए 5,10,000 यूरो का भुगतान किया गया था। प्रियांक मेहता न केवल इस विदेशी संपत्ति के मालिक हैं बल्कि वे इस फ्लैट से लगातार किराये की मोटी आय भी प्राप्त कर रहे हैं। भारतीय कानून और कर नियमों के अनुसार किसी भी भारतीय नागरिक के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपनी समस्त विदेशी संपत्तियों और उनसे होने वाली कमाई का पूरा विवरण आयकर रिटर्न के फॉरेन एसेट्स शेड्यूल में स्पष्ट रूप से दर्ज करे। हालांकि प्रियांक मेहता ने अपने दाखिल किए गए टैक्स रिटर्न में इन निवेशों और किराये से होने वाली कमाई की जानकारी को पूरी तरह से गुप्त रखा था। यह गैर प्रकटीकरण सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा नियमों और कर कानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर निदेशालय ने संबंधित संपत्तियों के निवेश से जुड़े सभी कागजातों को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया को मजबूती से बढ़ाया जा सके।
भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी और जटिल ट्रांजेक्शन का विवरण
ईडी की छापेमारी के दौरान प्रियांक मेहता के आवासीय और व्यापारिक परिसर से 31 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई है। इस नकदी के स्रोत के संबंध में मौके पर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका जिसके बाद इसे जब्त कर लिया गया। इसके अलावा जांच में धन के स्थानांतरण के एक बेहद जटिल नेटवर्क का भी पता चला है। जांच के अनुसार 5,48,000 अमेरिकी डॉलर की एक बड़ी राशि को पहले एलआरएस स्कीम का सहारा लेकर अमेरिका भेजा गया और फिर वहां से चालाकी के साथ इसे पुर्तगाल स्थानांतरित कर दिया गया। इसके अतिरिक्त 4,20,998 यूरो की एक और राशि जो भारतीय मुद्रा में लगभग 3.65 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है उसे भी सीधे तौर पर पुर्तगाल भेजा गया था। इस पूरी रकम का इस्तेमाल लिस्बन में फ्लैट खरीदने और अन्य संबंधित खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि लिस्बन के एक बैंक खाते में अभी भी लगभग 2.1 करोड़ रुपये की शेष राशि मौजूद है। प्रवर्तन निदेशालय अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहा है कि इन विशाल फंड्स का वास्तविक स्रोत क्या था और इस पूरे मामले में और कौन से वित्तीय संस्थान या व्यक्ति मददगार रहे हैं। फिलहाल एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और जांच की प्रक्रिया अभी निरंतर जारी है।
