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बरगी बायपास पर मौत से आमना-सामना: फिर भी मलबे में दबी दो जिंदगियों को बचा लिया



जबलपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग नागपुर-जबलपुर रोड पर बरगी बायपास के समीप शनिवार को एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसे देख राहगीरों की रूह कांप गई। एक पल की चूक और अगले ही पल सड़क पर सिर्फ धूल का गुबार और मलबे के बीच दबी चीखें थीं। वाहन क्रमांक एमएच 40 बीएल 6986 के चालक ने सामने से आ रहे एक पिकअप वाहन को बचाने के लिए जैसे ही स्टेयरिंग मोड़ा, भारी-भरकम ट्रक अनियंत्रित होकर ताश के पत्तों की तरह पलट गया। केबिन के भीतर चालक और परिचालक बुरी तरह फंस चुके थे और हर गुजरते सेकंड के साथ उनकी सांसें अटक रही थीं।

मौत और जिंदगी के बीच की वो चंद मिनटें


हादसे के ठीक बाद वहां सन्नाटा पसर गया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसी दौरान संभागीय परिवहन उड़नदस्ता की टीम गश्त पर थी। चीख-पुकार सुनते ही प्रभारी राजेंद्र साहू और उनकी टीम ने बिना एक पल गंवाए अपनी जान जोखिम में डालकर बचाव कार्य शुरू किया। लोहे के मलबे में तब्दील हो चुके केबिन के भीतर फंसे घायलों को बाहर निकालना लगभग नामुमकिन लग रहा था। टीम ने तत्परता दिखाते हुए चालक और परिचालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद लोगों की आंखों में चमक आ गई। टीम ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और घायलों को उपचार के लिए मेडिकल अस्पताल रवाना किया।

रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर,लगा लम्बा जाम

​दुर्घटना इतनी भीषण थी कि ट्रक के पलटते ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के पहिए थम गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर लंबी कतारें लग गईं और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायल अस्पताल भेजे जा चुके थे, लेकिन अब चुनौती थी राजमार्ग को फिर से शुरू करने की। परिवहन उड़नदस्ता की टीम ने क्रेन और अन्य मशीनरी का समन्वय कर क्षतिग्रस्त ट्रक को सड़क से हटाया। अभियान में प्रभारी राजेंद्र साहू के साथ परिवहन उप निरीक्षक अक्षय पटेल, परिवहन आरक्षक पीयूष मरावी, आशुतोष मोघे, सारंगधर महाले, अशोक खापर्डे और उमाशंकर उपाध्याय सहित समस्त स्टाफ मुस्तैद रहा। 

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