बताया जाता है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से होटल, रेस्टॉरेंट कारोबार और शादियों के अलावा सोना-चांदी आभूषण बनाने वाले कारीगरों और रेहड़ी पर भी संकट खड़ा हो गया है। जबलपुर सराफा में करीब 2 हजार से ज्यादा कारीगर काम करते हैं। हर कारीगर को महीने में औसतन 3 सिलेंडर की जरूरत होती है। इस हिसाब से सराफा कारोबार में महीने भर में करीब 9 हजार सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं, यानी रोजाना लगभग 300 सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। जिसके चलते सराफा कारोबारियों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर की बात की जाए तो लोगों को गैस सिलेंडर के लिए भटकते देखा जा रहा है। हॉकरों द्वारा चोरी छिपे 13 सौ रुपए में गैस सिलेंडर देने की बात की जा रही है। यही हाल रहे तो आने वाले दिनों में सिलेंडरों को लेकर हा-हा कार मच सकता है।
दमोह में गैस की किल्लत से रेस्टॉरेंट संचालक चिंतित-
दमोह में चाइनीज रेस्टॉरेंट चलाने वाले कारोबारियों का कहना है कि उनके पास सिर्फ तीन दिन का ही गैस स्टॉक बचा है। इसके बाद अगर गैस की सप्लाई नहीं हुई तो रेस्टॉरेंट चलाना मुश्किल हो जाएगा। अगर समय पर गैस नहीं मिली तो उन्हें मजबूरन अपना रेस्टॉरेंट बंद करना पड़ सकता है। इससे न सिर्फ उनका कारोबार प्रभावित होगा, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों पर भी असर पड़ेगा।
उज्जैन में कमर्शियल सिलेंडर की कमी से रेस्टॉरेंट संचालक परेशान-
कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगने के बाद महाकाल मंदिर के आसपास संचालित करीब 350 से अधिक रेस्टॉरेंट सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दो दिन से गैस की सप्लाई लगभग 50 प्रतिशत कम हो गई है। जिससे कई रेस्टॉरेंट में सिलेंडर खत्म होने की स्थिति बन गई है। अगर यही हाल रहा तो भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कई रेस्टॉरेंट संचालक अब खाना बनाने के लिए कोयले के विकल्प की तलाश में दुकानदारों से संपर्क कर रहे हैं।
कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति पर रोक से व्यापारियों में नाराजगी-
भोपाल में होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और केटरिंग व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों के ऑर्डर पर लगी रोक के विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस रोक से शहर के हजारों छोटे व्यापारियों का काम प्रभावित हो रहा है, क्योंकि कमर्शियल गैस सिलेंडर इन व्यवसायों के संचालन का मुख्य आधार है। विवाह समारोहों के सीजन में केटरिंग और आयोजनों के लिए गैस सिलेंडरों की मांग अधिक रहती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि पूरी आपूर्ति बहाल करना संभव न हो तो कम से कम सीमित मात्रा में कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंए ताकि व्यवसाय पूरी तरह बंद होने की स्थिति न बने।
शिवपुरी में गैस के लिए भटक रहे लोग
शिवपुरी में गैस की भारी किल्लत है। एजेंसियां सर्वर डाउन होने का हवाला देकर बुकिंग नहीं कर रही हैं। सिलेंडर कब मिलेगाए डीलर इसकी कोई निश्चित तारीख नहीं बता पा रहेए जिससे उपभोक्ताओं में भारी रोष और अनिश्चितता का माहौल है।
रतलाम में होटल पर लगाई डीजल भ_ी-
रतलाम में कमर्शियल गैस सिलेंडर के शॉर्टेज को चलते कोर्ट चौराहा स्थित चाय नाश्ते के होटल पर डीजल भ_ी लगाई गई है। दुकान संचालक शैलेंद्र जैन ने बताया कमर्शियल सिलेंडर मिलना बंद हो गया है। डेली जरूरत पड़ती है। हमने वैकल्पिक व्यवस्था कर 15 हजार रुपए में डीजल भट्ठी लगाई है। इससे आर्थिक भार और बढ़ गया है।
चूल्हे पर लौटे रेस्टॉरेंट, सोलर का विकल्प तलाश रहे-
दमोह जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से रेस्टॉरेंट और कैफे संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गैस नहीं मिलने के कारण अब संचालक मजबूरी में पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों का उपयोग करने को मजबूर हैं। रेस्टॉरेंट संचालक का कहना है कि एक ओर हम आधुनिकता की बात करते हैं, लेकिन आज हालात हमें दशकों पीछे ले गए हैं।
मंडला में सर्वर ठप होने से हॉस्टल और मध्याह्न भोजन की सप्लाई पर ब्रेक-
मंडला जिले में रसोई गैस की किल्लत ने सरकारी व्यवस्थाओं को भी अपनी चपेट में ले लिया है। हालांकिए घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित सप्लाई का दावा किया जा रहा हैए लेकिन आज सर्वर डाउन होने के कारण नई बुकिंग पूरी तरह ठप रही। सबसे गंभीर स्थिति कमर्शियल क्षेत्र में है, जिसकी सप्लाई कंपनियों ने रोक दी है।
प्रशासन ने मध्याह्न भोजन और हॉस्टल जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए नियमित गैस देने का वादा किया था, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते पोर्टल पर इनकी बुकिंग नहीं हो पा रही है। इसके परिणाम स्वरूप इन महत्वपूर्ण संस्थानों में भी गैस मिलना बंद हो गई हैए जिससे स्कूली बच्चों के भोजन और छात्रावासों की व्यवस्था पर संकट मंडराने लगा है।
नरसिंहपुर में बुकिंग पोर्टल में तकनीकी खामी-
नरसिंहपुर में गैस बुकिंग को लेकर संकट बना हुआ है। ग्राहकों का आरोप है कि नंबर डायल करने पर भी बुकिंग नहीं हो रही। वहीं एजेंसी संचालकों ने स्पष्ट किया है कि बिना डिजिटल बुकिंग के सिलेंडर नहीं मिलेगा। इस तकनीकी उलझन के कारण लोग एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं।