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ईरान युद्ध ने पीने वाले पानी में लगाई आग, 11 प्रतिशत हुआ महंगा, बिसलेरी-बैली जैसी कंपनियों ने बढ़ाया दाम

नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका-इस्राइल युद्ध की वजह से गैस और तेल की कीमतों में जबरदस्त इजाफा हो रहा है. गैस और तेल की कीमतें बढऩे के बीच अब बोतलबंद पानी की कीमतों में भी आग लग गई है. ईरान युद्ध की वजह से बोतलबंद पानी की कीमतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, क्योंकि प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों के दाम बढ़ गए हैं.

216 रुपये का बिसलेरी का एक कैरेट अब इतने में मिल रहा

दरअसल, तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होने से पॉलिमर की लागत में इजाफा हो रहा है, जो प्लास्टिक की बोतलें बनाने का एक प्रमुख सामाग्री है. बाजार पर इस वजह से दबाव पड़ रहा है. बोतलबंद पानी के मार्केट में एक तिहाई से अधिक कब्जे की हुई देश की सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी ने कीमतों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. एक लीटर पानी के एक कैरेट की कीमत अब से 240 रुपये होगी, जो अब तक 216 रुपये थी. बिसलेरी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज का कहना है कि पैकेजिंग सामाग्री की लागत में बड़ी वृद्धि हुई है, जिस वजह से पैकेट बंद पानी 20 रुपये लीटर तक बढ़ गई है. पिछले 15 दिन में पैकेजिंग सामाग्री की कीमत में 70 फीसद से अधिक का उछाल आया है. कंपनी का कहना है कि वर्तमान स्थिति किसी के भी नियंत्रण में नहीं है. 

इन वाटर कंपनियों ने भी बढ़ाई कीमतें

बिसलेरी के अलावा, पार्ले एग्रो ने भी अपनी पानी की बोतल में 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है. क्लियर प्रीमियम वॉटर के सीईओ नयन शाह का कहना है कि युद्ध की वजह से हमें पानी की खुदरा कीमतों में आठ से 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना पड़ रहा है. 

बोतल निर्माण सामग्री की कीमत 50 फीसदी तक बढ़ी

तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से प्लास्टिक की बोतलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली चीजों की लागत 50 प्रतिशत बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो हो गई है. ढक्कनों की कीमत भी दोगुनी होकर 0.45 रुपये प्रति पीस हो गई है. लेबल, टेप और नालीदार बक्सों के दाम भी बढ़ गए हैं. इस वजह से सरकार द्वारा कम किए गए टैक्स का लाभ मिलना बंद हो गया है. सरकार ने सितंबर 2025 में बोतलबंद पानी पर लागू 18 फीसद जीएसटी को घटाकर पांच फीसदी कर दिया था. इससे कई कंपनियों को पानी के भाव कम करने के लिए मोटिवेशन मिल गया था. 

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