इस मौके पर सपा नेता आशीष मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिले का स्वास्थ्य तंत्र भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब जनता बुनियादी इलाज के लिए भटक रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिले में फर्जी अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। कई सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते। कार्यकर्ताओं ने बरेला में एक प्रसूता की मौत और डिंडोरी में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का हवाला देते हुए विभागीय लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शन के दौरान कुछ पीडि़त मरीज भी मौजूद रहे। जिन्होंने निजी अस्पतालों पर लापरवाही के आरोप लगाए। शकुन भाई नामक एक पीडि़त ने बताया कि सड़क हादसे के बाद उन्हें एक स्मार्ट सिटी अस्पताल ले जाया गया था, जहां कथित तौर पर तीन दिन तक उनका इलाज नहीं किया गया। शकुन भाई ने आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही के चलते उनका पैर काटना पड़ा, अब वे अपाहिज जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
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