जबलपुर। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश के लिए कोटा विदिशा सागर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की बड़ी सौगात मिली है। फिलहाल ये प्रोजेक्ट शुरुआती स्थिति में है। इसका रूट और एलाइनमेंट तय होने के बाद दूरी और कनेक्टिविटी को लेकर तस्वीर साफ हो पाएगी। ये सब तय करते समय ये भी देखा जाएगा कि एक्सप्रेस वे से किस तरह इंडस्ट्रियल एरिया जोड़े जाएं, जो राज्यों और देश की अर्थव्यवस्था को पंख लगाने का काम करें। फोकस इस बात पर रहेगा कि एक्सप्रेस वे से किस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को कैसे जोड़ा जाए कि इंडस्ट्री को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले।
गौरतलब है कि पिछले दिनों केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने विदिशा में कोटा विदिशा सागर एक्सप्रेस बनाए जाने का एलान किया है। 16 हजार करोड़ की लागत से बनने जा रहे इस एक्सप्रेस वे से सागर और विदिशा से कोटा की दूरी कम हो जाएगी। इसके साथ ही राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों प्रदेश की राजधानी भोपाल और जयपुर की दूरी भी कम हो जाएगी, क्योंकि फिलहाल भोपाल से जयपुर जाने के लिए कोटा होकर जाना होता है। इस नए एक्सप्रेस वे के बनते ही करीब 75 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। दूरी कम होने के साथ.साथ एक्सप्रेस वे पर सफर में लगने वाला समय भी करीब तीन घंटे कम होने की उम्मीद है। इस एक्सप्रेस वे का प्रमुख उद्देश्य विदिशा के जरिए भोपाल और जयपुर के बीच की दूरी कम करना और सागर के जरिए जबलपुर, कानपुर और यूपी के दूसरे शहरों से कनेक्टिविटी सुधारना है।
अभी लोग सवाई माधोपुर मार्ग का उपयोग करते हैं, लेकिन कोटा वाला मार्ग ज्यादा प्रचलन में है। भोपाल से जयपुर पहुंचने में 10-12 घंटे का समय लगता है। कोटा विदिशा सागर एक्सप्रेस वे से करीब 75 किमी की दूरी कम होने और एक्सप्रेस वे कारण सफर का समय तीन घंटे कम हो सकता है। दरअसल, इस एक्सप्रेस वे के जरिए भोपाल और कोटा को सीधे करके जोड़ना है। फिलहाल कोटा से विदिशा की दूरी 350 किमी और सागर की दूरी 410 किमी है। कोटा-विदिशा एक्सप्रेस वे से 75 किलोमीटर की दूरी कम होगी। सीधा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे बनने से कोटा से विदिशा की दूरी करीब 250 किमी और सागर की दूरी 350 किमी हो जाएगी।
