जबलपुर। जबलपुर के चर्चित दुष्कर्म मामले में यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ऋषभ मिश्रा को जिला सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला न्यायाधीश महिमा कछवाहा की अदालत ने मंगलवार को ऋषभ मिश्रा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि मामले में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पर्याप्त प्रतीत नहीं होते हैं।
विवाहित महिला ने लगाया था शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप
पूरा मामला जबलपुर के लार्डगंज थाना क्षेत्र का है। एक विवाहित महिला ने पूर्व पार्षद द्वारका मिश्रा के पुत्र ऋषभ मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि ऋषभ ने उसे शादी का झांसा दिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने ठोस दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि कथित घटना वर्ष 2022 की बताई जा रही है, जबकि इसकी एफआईआर तीन साल बाद यानी वर्ष 2025 में दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि चूंकि शिकायतकर्ता पहले से विवाहित है और अपने पति के साथ रह रही है, इसलिए "शादी का झांसा देकर दुष्कर्म" करने का आरोप कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। साथ ही, इसे राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित बताया गया।
अदालत का फैसला: प्रथम दृष्टया आरोप मजबूत नहीं
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद माना कि वर्तमान स्थिति में आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया मजबूत नजर नहीं आते। इसी आधार पर न्यायालय ने ऋषभ मिश्रा को जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया।
