धान मिलिंग में करोड़ों का गबन:ईओडब्ल्यू ने अफसर और मिलर पर कसा शिकंजा,फाइलों में छिपे बड़े राज


एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों और व्यापारिक साठगांठ के बिना इतने बड़े घोटाले को अंजाम देना संभव नहीं था


जबलपुर। जिले में शासकीय धान की खरीदी और मिलिंग प्रक्रिया में एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला विपणन अधिकारी  हिरेन्द्र रघुवंशी, राइस मिल संचालक विवेक तिवारी और नागरिक आपूर्ति निगम व मार्कफेड के कई अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के गंभीर आरोप हैं।

​करोड़ों के सरकारी धान में हेराफेरी का खुलासा

​ईओडब्ल्यू को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के भंडारण और मिलिंग में व्यापक पैमाने पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। जांच एजेंसी ने जब 8 दिसंबर 2023 से 20 सितंबर 2024 के बीच के रिकॉर्ड खंगाले, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि कागजों पर जिस धान का उठाव और मिलिंग दिखाई गई थी, वास्तव में उसका एक बड़ा हिस्सा गायब था या रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई थी। अधिकारियों और मिलर्स के बीच एक सुनियोजित तालमेल पाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्टॉक में हेराफेरी कर निजी लाभ कमाना था।

​रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन में भारी विसंगतियां

​जांच के दौरान ईओडब्ल्यू की टीम ने पाया कि धान के भंडारण  और मिलों तक उसे पहुंचाने की प्रक्रिया  में भारी विसंगतियां हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, जितना धान गोदामों से निकला, उतना मिलों तक नहीं पहुंचा। इसके अलावा, मिलिंग के बाद जो चावल वापस सरकारी गोदामों में जमा होना चाहिए था, उसके अनुपात में भी बड़ी कमी पाई गई है। दस्तावेजों की स्क्रूटनी से पता चला कि कई जगह फर्जी प्रविष्टियां की गईं और स्टॉक को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। ईओडब्ल्यू का मानना है कि इस गबन के कारण शासन को भारी आर्थिक हानि हुई है, जिसकी सटीक गणना अभी की जा रही है।

​नामजद आरोपियों की भूमिका और मिलीभगत

​इस पूरे मामले में तत्कालीन डीएमओ हिरेन्द्र रघुवंशी की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। विभाग का प्रमुख होने के नाते उनकी जिम्मेदारी धान के उठाव और मिलिंग की निगरानी करना था, लेकिन आरोप है कि उन्होंने राइस मिलर विवेक तिवारी और अन्य सहयोगियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। इसके अलावा, मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के उन अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है, जो स्टॉक के सत्यापन और गुणवत्ता जांच के लिए उत्तरदायी थे। ईओडब्ल्यू की एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों और व्यापारिक साठगांठ के बिना इतने बड़े घोटाले को अंजाम देना संभव नहीं था।

​शासन को आर्थिक क्षति और आगामी कड़ी जांच

​प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है। ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसी अब संबंधित विभागों से मूल दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी और मिलिंग अनुबंधों की फाइलें जब्त कर रही है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और राइस मिलर्स और विभागीय कर्मचारियों के नाम भी इस एफआईआर में जुड़ सकते हैं। फिलहाल, आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी और पूछताछ की तैयारी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गबन की गई राशि का निवेश कहाँ किया गया है।

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