जबलपुर। सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन से जुड़े विवाद ने अब एक बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में चल रही इस सुनवाई में एक के बाद एक, दो न्यायाधीशों ने खुद को केस से अलग कर लिया है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे पहले जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनवाई से खुद को अलग किया था, जिसके लिए उन्होंने कोई विशिष्ट कारण दर्ज नहीं कराया। इसके बाद मामला जस्टिस संदीप एन भट्ट की बेंच के पास पहुँचा, लेकिन 27 फरवरी 2026 को उन्होंने भी स्वयं को इस प्रकरण से अलग कर लिया। आधिकारिक वेबसाइट पर मामला "इस बेंच के समक्ष सूचीबद्ध न किया जाए" के नोट के साथ दिखाई दे रहा है। लगातार दो जजों के हटने से अब नई बेंच के गठन तक सुनवाई अधर में लटक गई है।
विवाद की जड़: अवैध शराब परिवहन और आबकारी विभाग का एक्शन
यह पूरा कानूनी संघर्ष 4 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब आबकारी विभाग ने सोम डिस्टिलरीज के दो प्रमुख लाइसेंस निलंबित कर दिए। विभाग की इस कार्रवाई का आधार साल 2023 का वह प्रकरण है, जिसमें कंपनी के कर्मचारियों को फर्जी परमिट के माध्यम से अवैध शराब के परिवहन का दोषी पाया गया था। कंपनी ने विभाग के इसी सख्त फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहाँ पहले से ही कंपनी के खिलाफ कई अन्य मामले भी विचाराधीन हैं।
नई बेंच और निष्पक्षता की चुनौती
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, न्यायाधीशों का स्वयं को अलग करना न्यायिक नैतिकता का हिस्सा है ताकि किसी भी प्रकार के हितों के टकराव से बचा जा सके। हालांकि, इस मामले में कारणों का खुलासा न होना कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें मुख्य न्यायाधीश पर हैं कि वे इस संवेदनशील मामले की बागडोर किस नई बेंच को सौंपते हैं। कंपनी पर लगने वाले विभिन्न आरोपों और अदालती कार्यवाही के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि अगली सुनवाई में क्या रुख अपनाया जाता है।
