एनएच 30 पर करीब 150 किमी के एरिया में दोनों तरफ मिलाकर 100 से ज्यादा जगह यह मार्किंग की गई है। यह मार्किंग एक साथ नहीं है। चार-चार मार्क ऐसी ऐसी जगहों को आइडेंटिफाई कर बनाए गए हैं जहां सड़कों पर मवेशी बैठते हैं। रेड मार्किंग वाली जगह पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में बड़े अक्षरों में लिखा है। साथ ही इस मार्किंग के किनारे ट्रैफिक साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दिनों में अक्सर ये शिकायतें मिलती हैं कि नेशनल हाईवे पर बहुत सारे मवेशी बैठे रहते हैं। उन्हें हटाने का प्रयास लगातार किया जाता है। वहां चालकों को एडवांस वार्निंग मिल जाए इसलिए साइन बोर्ड लगा रहे हैं। कुछ जगहें चिन्हित की हैं जहां अक्सर मवेशी बैठते हैं। वहां साइन बोर्ड के साथ रेड मार्किंग कर वाहनों को अलर्ट करने के लिए संदेश लिखे जा रहे हैं। रोड पर जो रेड ब्लॉक बनाए गए हैं उनका साइज 2 बाय 3 मीटर है। ये थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग के जरिए किया गया है। ये ब्लॉक नौरादेही के तर्ज पर बनाए गए हैं। इन मार्किंग में छोटी से बड़ी गाडिय़ों में कोई फिसलन नहीं होती। वाहन अगर ज्यादा स्पीड पर चल रहे हैं तो वार्निंग नहीं दिखेगी, लेकिन उन्हें एक अलर्ट तो मिलेगा कि कुछ रेड बॉक्स बना हुआ है। बॉक्स में रिफ्लेक्टिविटी वाली कोड मार्किंग है जैसे ही वाहन की लाइट पड़ेगी तो अक्षर दिखाई देंगे। अभी कई जगह पर काम चल रहा है। ताकि लोग ये डिफरेंशियट कर पाएं कि ये नेशनल हाईवे का सेक्शन है या दूसरे डिपार्टमेंट का सेक्शन है। ये इनीशिएटिव भी इसी तरह का है।
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