मृत गौवंश के अपमान पर भड़के गौसेवक, नगर निगम के सामने शव रखकर किया प्रदर्शन
जबलपुर। मृत गौवंश के अंतिम संस्कार को लेकर नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मुद्दे को लेकर आक्रोशित गौसेवकों ने नगर निगम मुख्यालय के सामने मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मृत गौवंश के शव को सड़क पर रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। गौसेवकों का आरोप है कि निगम के कर्मचारी न केवल संवेदनहीन हो चुके हैं, बल्कि वे गौवंश के अंतिम संस्कार के नाम पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार में भी लिप्त हैं।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: रुपये लेकर नाली में फेंका शव
प्रदर्शन कर रहे गौसेवकों ने नगर निगम के कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मृत गौवंश के विधिवत अंतिम संस्कार के लिए कर्मचारियों द्वारा 3 हजार रुपये की मांग की गई थी। पैसे देने के बावजूद, कर्मचारियों ने गौवंश का सम्मानजनक अंतिम संस्कार करने के बजाय उनके शवों को नाली में फेंक दिया। गौसेवकों ने बताया कि कठौन्दा स्थित 'डेड एनिमल इंसीनेटर' प्लांट में जानवरों के अंतिम संस्कार के लिए सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क (बड़े जानवरों के लिए 2850 रुपये और छोटे जानवरों के लिए 1050 रुपये लिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है।
चार महीने से बंद है एम्बुलेंस सेवा, अधिकारी ने दिया जांच का भरोसा
गौसेवकों ने केवल भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि व्यवस्थागत विफलता पर भी सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घायल गौवंश के उपचार के लिए जरूरी एम्बुलेंस सेवा पिछले चार महीनों से बंद पड़ी है, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण कई गोवंश दम तोड़ रहे हैं। हंगामे की स्थिति को देखते हुए नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। निगम अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
