बजट में सरकार की कथनी और करनी का प्रतिबिंब नहीं दिखा: भारतीय किसान संघ


जबलपुर।
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आम बजट पर भारतीय किसान संघ ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि बजट के कुछ प्रावधान सराहनीय हैं, लेकिन समग्र रूप से यह किसानों की वास्तविक अपेक्षाओं और सरकार की घोषित मंशा पर खरा नहीं उतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट में वह स्पष्टता नहीं दिखी जो सरकार के दावों में नजर आती है।

आधारभूत संरचना और नवाचार का स्वागत

​महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने बजट के सकारात्मक पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 500 अमृत सरोवर का निर्माण और समुद्री क्षेत्रों में मछली पालन को सशक्त बनाना बेहतर कदम हैं। इसके अलावा, पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण के तहत नारियल, काजू, कोको व चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली खेती को प्रोत्साहित करने के निर्णय का संघ ने स्वागत किया है। ग्रामीण महिला समूहों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए 'शी मार्ट' की स्थापना को भी एक अच्छी पहल माना गया है।

छोटे किसानों की उपेक्षा और जीएसटी का बोझ

​भारतीय किसान संघ ने बजट की कमियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि छोटे किसानों की समस्याओं को इसमें पर्याप्त स्थान नहीं मिला है। मिश्र ने कहा कि कृषि यंत्रों पर जीएसटी की उच्च दरें किसानों की कमर तोड़ रही हैं। साथ ही, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को और अधिक विस्तार न देना चिंताजनक है। केसीसी कार्ड की सीमा 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की घोषणा तो की गई है, परंतु धरातल पर उसका क्रियान्वयन शून्य है, जो किसानों के साथ छलावा जैसा है।

प्राकृतिक खेती और संसाधन प्रबंधन पर सवाल

​प्राकृतिक खेती को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए संघ ने कहा कि केवल लक्ष्य घोषित करने से परिवर्तन नहीं आएगा। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को डीबीटी के माध्यम से जैविक खाद तैयार करने हेतु प्रोत्साहन देने का बजट में कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, देशभर की फसलों में बढ़ते रसायनों के स्तर की जांच करने और उसे रोकने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बजट में दिखाई नहीं देती। संघ की मांग है कि बजट सत्र की चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष सकारात्मक संवाद करें और किसानों के व्यापक हित में बजट में आवश्यक संशोधन सुनिश्चित करें।

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